किसानों का नया व्यापार बना "मधुमक्खी पालन", एक ही खेत से मिलेगा डबल मुनाफा! सरकार दे रही है लाखों की मदद

किसानों का नया व्यापार बना "मधुमक्खी पालन", एक ही खेत से मिलेगा डबल मुनाफा! सरकार दे रही है लाखों की मदद

भीलवाड़ा के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ मधुमक्खी पालन अपनाकर अपनी आय दोगुनी कर रहे हैं. उद्यान विभाग की योजना के तहत 2 लाख की यूनिट पर 40% अनुदान मिल रहा है. किसानों ने 50-50 बॉक्स लगाकर शहद उत्पादन शुरू किया है, जो 600 से 900 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है. मधुमक्खियों के कारण परागण बेहतर होने से फसलों की पैदावार भी बढ़ी है. अब किसान अपने शहद को ऑनलाइन बेचने की योजना बना रहे हैं, जिससे यह व्यवसाय युवाओं के लिए स्वरोजगार का बड़ा जरिया बन गया है.

किसानों का नया व्यापार बना "मधुमक्खी पालन", एक ही खेत से मिलेगा डबल मुनाफा! सरकार दे रही है लाखों की मदद

भीलवाड़ा. राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में अब किसान पारंपरिक खेती के सीमित दायरे से बाहर निकलकर अतिरिक्त आय के नए रास्ते तलाश रहे हैं. इस दिशा में मधुमक्खी पालन (Beekeeping) एक तेजी से उभरता और लोकप्रिय विकल्प साबित हो रहा है. उद्यान विभाग की राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत युवाओं को मिल रहे प्रशिक्षण और भारी अनुदान ने इस व्यवसाय को नई ऊंचाई दी है. जिले के कई प्रगतिशील किसानों ने हाल ही में 50-50 बॉक्स की यूनिट स्थापित कर न केवल शहद उत्पादन में सफलता हासिल की है, बल्कि अपनी मासिक आय में भी जबरदस्त वृद्धि दर्ज की है.

मधुमक्खी पालन व्यवसाय की सबसे बड़ी खूबी इसकी कम लागत और अधिक मुनाफा है. करीब 2 लाख रुपए की शुरुआती लागत से तैयार होने वाली एक यूनिट पर सरकार 40 प्रतिशत तक का अनुदान दे रही है. इससे किसानों पर शुरुआती निवेश का आर्थिक बोझ काफी कम हो जाता है. उपनिदेशक उद्यान शंकर सिंह ने बताया कि इस योजना के तहत 50 बॉक्स और 50 कॉलोनी के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है. इस व्यवसाय के लिए खेत या बगीचा होना अनिवार्य है, क्योंकि मधुमक्खियां फसलों और पेड़ों पर खिलने वाले फूलों से मकरंद (Nechter) एकत्र कर शहद बनाती हैं.

फसल के साथ शहद का ‘डबल धमाका’

भीलवाड़ा के मांडल निवासी आशुतोष व्यास इस बदलाव के बड़े उदाहरण हैं. उन्होंने विभाग से प्रशिक्षण लेने के बाद अपने खेत पर 50 बॉक्स के साथ यूनिट शुरू की. दिसंबर और जनवरी के दौरान सरसों की फसल के फूलों से उन्हें हर महीने प्रति बॉक्स 30 किलो से अधिक शहद प्राप्त हुआ. वर्तमान में उनका शहद घर बैठे 600 रुपए प्रति किलो की दर से बिक रहा है. खास बात यह है कि जब फूलों का सीजन नहीं होता, तब मधुमक्खियों को जीवित रखने के लिए शक्कर के घोल का भोजन दिया जाता है. मधुमक्खियां खुद-ब-खुद फूलों से मधु लाने और उसे छत्ते में सुखाने का काम करती हैं, इंसान को केवल शहद एकत्र करना होता है.

बगीचों में मुनाफे की मिठास

कालसांस के पास नींबू और अमरूद का बगीचा चलाने वाले चेनसिंह राठौड़ ने भी अपने बाग में 50 बॉक्स रखवाए हैं. वे बताते हैं कि नींबू और अमरूद के उत्पादन के साथ-साथ अब उन्हें शहद से भी अतिरिक्त कमाई हो रही है. उनका शहद ‘मयूर ब्रांड’ के नाम से 800 से 900 रुपए प्रति किलो की दर से बिक रहा है. अब वे अपने उत्पाद को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए बड़े बाजार में बेचने की तैयारी कर रहे हैं. मधुमक्खी पालन का एक बड़ा वैज्ञानिक लाभ यह भी है कि इससे परागण (Pollination) बेहतर होता है, जिससे मुख्य फसल की पैदावार भी 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ जाती है.

This is the most recent post.
Older Post

Post a Comment

[blogger][facebook][disqus][spotim]

Author Name

NEWSBIN24

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.