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सिर्फ रजिस्ट्री कराने से आप मकान के असली मालिक नहीं बनते; जानें कौन-से डॉक्यूमेंट्स हैं जरूरी?

अगर आपने नया घर या प्लॉट खरीदा है और सोचते हैं कि रजिस्ट्री होते ही आप उसके पूरी तरह कानूनी मालिक बन गए हैं, तो यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री जरूरी होती है, लेकिन इसके अलावा भी कई ऐसे डॉक्यूमेंट हैं, जो आपके मालिकाना हक को मजबूत बनाते हैं।

सिर्फ रजिस्ट्री कराने से आप मकान के असली मालिक नहीं बनते; जानें कौन-से डॉक्यूमेंट्स हैं जरूरी?
अगर आपने हाल ही में कोई नया घर, प्लॉट या फ्लैट खरीदा है और उसकी रजिस्ट्री करवा ली है, तो खुश होने से पहले यह जरूरी सच जान लीजिए। आम तौर पर लोग मानते हैं कि रजिस्ट्री होते ही वे संपत्ति के पूर्ण मालिक बन गए हैं, लेकिन प्रॉपर्टी कानून के मुताबिक सिर्फ रजिस्ट्री करा लेना ही मालिकाना हक की गारंटी नहीं है। रजिस्ट्री यानी सेल डीड केवल इस बात का लीगल डॉक्यूमेंट है कि विक्रेता ने खरीदार से पैसे लेकर संपत्ति ट्रांसफर करने का समझौता किया है। संपत्ति का असली और कानूनी मालिक बनने के लिए आपके पास कुछ अन्य जरूरी डॉक्यूमेंट का होना भी अनिवार्य है।

1. म्यूटेशन सर्टिफिकेट

रजिस्ट्री के बाद जो सबसे पहला और अनिवार्य काम होता है, वह है म्यूटेशन यानी दाखिल-खारिज। म्यूटेशन के जरिए स्थानीय नगर निगम या राजस्व विभाग के सरकारी रिकॉर्ड में पुराने मालिक का नाम हटाकर आपका नाम बौरान-मालिक दर्ज किया जाता है। यदि आप म्यूटेशन नहीं कराते हैं, तो सरकारी रिकॉर्ड में पुराना मालिक ही दर्ज रहेगा। ऐसे में वह उस प्रॉपर्टी पर बैंक लोन ले सकता है या आपके साथ धोखाधड़ी की गुंजाइश बनी रहती है।

2. पजेशन लेटर

बिल्डर या विक्रेता द्वारा जारी किया गया पजेशन लेटर इस बात का लिखित प्रमाण होता है कि संपत्ति का कब्जा आपको आधिकारिक तौर पर सौंप दिया गया है। इसके बिना केवल कागजों पर मालिक होना अधूरा माना जाता है।

3. एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट

यह सर्टिफिकेट इस बात की पुष्टि करता है कि जो संपत्ति आप खरीद रहे हैं, उस पर कोई पुराना बकाया लोन, मॉर्गेज या कानूनी विवाद नहीं है। यह प्रॉपर्टी को पूरी तरह भारमुक्त साबित करता है।

4. प्रॉपर्टी टैक्स रसीद

रजिस्ट्री और म्यूटेशन के बाद अपने नाम पर नगर निगम या लोकल अथॉरिटी में प्रॉपर्टी टैक्स का खाता खुलवाएं। जब आप अपने नाम से टैक्स चुकाते हैं और उसकी रसीद आपके पास होती है, तो यह अदालतों में आपके मालिकाना हक का एक मजबूत और ठोस सबूत माना जाता है।

5. नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC)

यदि आप किसी सोसाइटी या अपार्टमेंट में घर ले रहे हैं, तो आरडब्ल्यूए (RWA) या बिल्डर से NOC लें। इसके अलावा, बिजली और पानी के कनेक्शन को तुरंत अपने नाम पर ट्रांसफर करवाएं।

आपके बच्चे की सेहत आपके हाथ! मोटापा,हाई बीपी और डायबिटीज का कारण जंक फूड, हर तीसरा बच्चा जंक फूड का शिकार, 

क्या आपका भी बच्चा पिज्जा-बर्गर और कोल्ड ड्रिंक का है शौकीन, तो आईसीएमआर-एनआईएन रिपोर्ट बढ़ा सकती है आपकी चिंता.

आपके बच्चे की सेहत आपके हाथ! मोटापा,हाई बीपी और डायबिटीज का कारण जंक फूड, हर तीसरा बच्चा जंक फूड का शिकार,

अगर आप उस बच्चे के माता-पिता हैं जो पिज्जा-बर्गर और कोल्ड ड्रिंक का सेवन बहुत करते हैं, तो ये रिपोर्ट आपकी चिंता बढ़ा सकती है. आपको बता दें कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के राष्ट्रीय पोषण संस्थान (NIN) की एक नई और चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में जंक फूड और कोल्ड ड्रिंक/जूस बच्चों की सेहत के सबसे बड़े दुश्मन बन चुके हैं. रिपोर्ट के अनुसार, देश में 5 से 19 साल के करीब 4.1 करोड़ बच्चे अधिक वजन या मोटापे से परेशान हैं. हालत इतनी खराब है कि लगभग 10% बच्चे प्री-डायबिटीज के शिकार हैं. 1% किशोरों को डायबिटीज हो चुकी है. 5% किशोर हाई ब्लड प्रेशर (BP) से जूझ रहे हैं. आसान शब्दों में कहें तो आज हर तीसरा बच्चा किसी न किसी बीमारी का शिकार हो चुका है.

आपके बच्चे की सेहत आपके हाथ! मोटापा,हाई बीपी और डायबिटीज का कारण जंक फूड, हर तीसरा बच्चा जंक फूड का शिकार,













आखिर क्यों बच्चों का दुश्मन बन रहा है यह HFSS फूड?

जंक फूड को वैज्ञानिक भाषा में HFSS (High Fat, Sugar and Salt) कहा जाता है. यानी ऐसे खाने की चीजें जिनमें फैट, चीनी और नमक की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. चिप्स, पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज, मोमो, कोल्ड ड्रिंक और पैकेट बंद स्नैक्स में न्यूट्रिशन ना के बराबर होता है और कैलोरी बहुत ज्यादा होती है. इन्हें रोज खाने से वजन तेजी से बढ़ता है. आगे चलकर यही मोटापा डायबिटीज, दिल की बीमारी, हाई बीपी और कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों की वजह बनता है.

आपके बच्चे की सेहत आपके हाथ! मोटापा,हाई बीपी और डायबिटीज का कारण जंक फूड, हर तीसरा बच्चा जंक फूड का शिकार,

14 साल में 150% बढ़ गया जंक फूड का बाजार-

रिपोर्ट बताती है कि भारत में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का मार्केट बहुत तेजी से फैला है. साल 2006 में जो बाजार सिर्फ 0.9 अरब डॉलर का था, वह 2019 तक बढ़कर 37.9 अरब डॉलर पर पहुंच गया. 2009 से 2023 के बीच ऐसे अनहेल्दी खाने की बिक्री में 150 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई है.

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विज्ञापन और बच्चों की जिद-

बच्चे खुद से दुकान पर जाकर जंक फ़ूड नहीं मांगते, बल्कि उन्हें टीवी, मोबाइल, क्रिकेट मैच और सोशल मीडिया के जरिए लगातार ये विज्ञापन दिखाए जाते हैं.
बच्चों के टीवी चैनलों पर आने वाले 90% विज्ञापन जंक फूड के होते हैं.
क्रिकेट मैचों के दौरान 80% से ज्यादा एड्स स्वीट ड्रिंक और अनहेल्दी खान-पान के होते हैं. 92.6% माता-पिता का मानना है कि स्कूल-कॉलेज के आसपास जंक फूड बहुत आसानी से मिल जाता है.

क्या कदम उठा रहे हैं बाकी देश?

  • दक्षिण कोरिया- टीवी पर जंक फूड के विज्ञापनों में 81% की कमी आई.
  • ब्रिटेन- बच्चों के सामने ऐसे विज्ञापनों का दिखना 37% कम हुआ.
  • नॉर्वे- 2026 से 18 साल से कम उम्र के बच्चों को टारगेट करने वाले डिजिटल विज्ञापनों पर पूरी तरह रोक लगा दी है.

अब भारत सरकार क्या कर सकती है?

  1. ICMR-NIN ने सरकार को कुछ कड़े कदम उठाने का सुझाव दिया है-
  2. हेल्थ टैक्स- सिगरेट और शराब की तरह ज्यादा फैट, चीनी और नमक वाले खाने पर भारी टैक्स लगाया जाए, ताकि जंक फूड महंगा हो और लोग पौष्टिक खाना चुनें.
  3. पैकेट पर बड़ी चेतावनियां- पैकेट के सामने साफ और बड़े अक्षरों में लिखा हो कि इसमें कितनी चीनी, फैट या नमक है.
  4. स्कूलों के पास रोक- स्कूल-कॉलेज के पास जंक फूड की बिक्री और विज्ञापनों पर सख्त पाबंदी लगाई जाए.

कौन सा जंक फूड देता है कौन सी बीमारी?

  1. चिप्स / फ्रेंच फ्राइज- हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा
  2. बर्गर / पिज्जा- मोटापा, दिल की बीमारी
  3. कोल्ड ड्रिंक- डायबिटीज, फैटी लिवर
  4. केक / पेस्ट्री- मोटापा, हाई ब्लड शुगर
  5. टॉफी / चॉकलेट- दांतों की सड़न, मोटापा
  6. इंस्टेंट नूडल्स- हाई ब्लड प्रेशर, किडनी पर असर

​World Health Organization (WHO) यह रिपोर्ट बताती है कि मीठे पेय और जंक फूड पर हेल्थ टैक्स लगाने से लोगों की खान-पान की आदतें कैसे सुधारी जा सकती हैं.

मेडिकल जर्नल 'द लैनसेट' की इस स्टडी अनुसार, 1990 से 2022 के बीच दुनिया भर के बच्चों और किशोरों में मोटापे की दर चार गुना से अधिक बढ़ गई है. इस दौरान भारत में भी पांच से 19 वर्ष की आयु के लगभग 1.25 करोड़ बच्चे और किशोर मोटापे या अत्यधिक वजन की समस्या से पीड़ित पाए गए.

बिजली के बिल में नाम कैसे बदलें? जानिए BRPL और BYPL की आसान ऑनलाइन व ऑफलाइन प्रक्रिया-दिल्ली 

बिजली के बिल में नाम कैसे बदलें? जानिए BRPL और BYPL की आसान ऑनलाइन व ऑफलाइन प्रक्रिया-दिल्ली
अगर आपने दिल्ली में नया मकान या दुकान खरीदा है और BSES बिजली के बिल में नाम बदलवाना चाहते हैं, तो यह काम अब बेहद आसान हो गया है. आप घर बैठे ऑनलाइन या नजदीकी BSES कार्यालय जाकर आसानी से Name Transfer करा सकते हैं. जानिए आवश्यक दस्तावेज, सीए नंबर (CA Number) के जरिए आवेदन करने की प्रक्रिया और फीस से जुड़ी पूरी जानकारी.

BSES rajdhani name change online:  दिल्ली में संपत्ति खरीदने या पारिवारिक हस्तांतरण के बाद बिजली के बिल में सही मालिक का नाम दर्ज होना बेहद जरूरी है. यदि आप BSES राजधानी पावर लिमिटेड (BRPL) या BSES यमुना पावर लिमिटेड (BYPL) के उपभोक्ता हैं, तो अब आपको नाम बदलवाने (Name Transfer) के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है.

दरअसल, BSES ने इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बना दिया है. आप अपनी सुविधा के मुताबिक ऑनलाइन पोर्टल के जरिए या नजदीकी डिवीजन ऑफिस जाकर नाम ट्रांसफर करा सकते हैं. आइए इसकी पूरी स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया जानते हैं.

आवेदन से पहले जुटा लें ये दस्तावेज

अगर आप अपने बिजली के कनेक्शन में नाम बदलवाना चाहते हैं, तो इसके लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू करने से पहले सभी जरूरी  कागजातों की स्कैन कॉपी (PDF या JPEG फॉर्मेट) अपने पास जरूर रख लें. दरअसल, बिजली के बिल में नाम बदलवाने के लिए बिजली कंपनियां आवेदन के साथ कुछ दस्तावेजों की भी मांग करती है, जिसकी पूरी लिस्ट नीचे दी गई है. 

  •  पहचान पत्र (ID Proof): आवेदक का आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी या पासपोर्ट.
  •  स्वामित्व का प्रमाण (Ownership Proof): प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री (Sale Deed), अलॉटमेंट लेटर, या म्यूटेशन सर्टिफिकेट.
  •  पुराना बिजली बिल: आखिरी जमा किया गया BSES बिजली का बिल.
  •  अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC): यदि संपत्ति के एक से अधिक संयुक्त मालिक हैं या जीवित व्यक्ति से नाम ट्रांसफर हो रहा है, तो पूर्व मालिक का NOC फॉर्म.
  •  मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate): यदि पुराने कनेक्शन धारक की मृत्यु हो चुकी है, तो उनका डेथ सर्टिफिकेट और लीगल वारिस (Legal Heir) होने का प्रमाण पत्र.

ऑनलाइन नाम बदलने की प्रक्रिया

  • अगर आप अपने बिजली बिल में नाम बदलवाना चाहते हैं, तो अब आप घर बैठे BSES बिजली बिल में नाम अपडेट करने के लिए आवेदन कर सकते हैं, बस इसके लिए आपको इन नीचे दिए गए आसान स्टेप्स का पालन करना होता है. 
  • अपने क्षेत्र के अनुसार BSES Delhi की आधिकारिक वेबसाइट या BYPL/BRPL के चेंज रिक्वेस्ट पोर्टल पर जाएं.
  • अपने पंजीकृत यूजर आईडी (User ID) से लॉगिन करें या नए उपभोक्ता के तौर पर रजिस्टर करें.
  • मुख्य पृष्ठ पर 'Connection Services' सेक्शन में जाएं और 'Change Request' पर क्लिक करें.
  • अपना 9 अंकों का CA Number (Consumer Account Number) और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर दर्ज करें. आपके मोबाइल पर आए OTP को दर्ज करके वेरीफाई करें.
  • 'Change Request Type' के ड्रॉपडाउन मेन्यू में जाकर 'Name Change' विकल्प को सिलेक्ट करें.
  • नए मकान मालिक की जानकारी भरें और मांगे गए सभी स्कैन किए गए दस्तावेजों को सही साइज में अपलोड करें.
  • यदि कोई प्रोसेसिंग फीस या सिक्योरिटी डिपॉजिट लागू होता है, तो उसका डिजिटल माध्यम से भुगतान करें.

प्रोसेसिंग का समय

आवेदन सफलतापूर्वक सबमिट होने के बाद आपको एक एक्नॉलेजमेंट नंबर (Acknowledgement Number) मिलेगा. इसके बाद आवेदन के मुताबिक, दस्तावेजों के भौतिक या डिजिटल सत्यापन के बाद 20 से 30 दिनों के भीतर आने वाले नए बिल में नया नाम अपडेट होकर आ जाएगा. 

ऑनलाइन प्रक्रिया

यदि आपको ऑनलाइन फॉर्म भरने में कोई तकनीकी परेशानी आ रही है, तो आप ऑफलाइन तरीका भी चुन सकते हैं. इसके लिए ऊपर बताए गए सभी आवश्यक दस्तावेजों की मूल प्रति और स्व-सत्यापित फोटोकॉपी साथ रखें. इसके बाद अपने क्षेत्र के नजदीकी BSES कस्टमर केयर सेंटर पर जाएं. वहां हेल्पडेस्क से 'Name Change Application Form' हासिल करें, उसे पूरा भरें और दस्तावेजों के साथ काउंटर पर जमा कर दें.

सत्यापन पूरा होने पर आपका आवेदन स्वीकार कर लिया जाएगा और अगली बिलिंग साइकिल में नाम अपडेट कर दिया जाएगा.

 रेलकर्मियों के मनचाहे ट्रांसफर पर गुड न्यूज, घर के बगल में मिल जाएगी पोस्टिंग, जानिए किन्हें मिलेगा फायदा

Railway on request transfer policy update: रेलकर्मियों के लिए गुड न्‍यूज है. वर्षों से अपने घर से काफी दूर काम कर रहे रेलवे के इंप्‍लाईज का ट्रांसफर अब उनके घर के पास हो सकेगा. इसके लिए रेलवे बोर्ड ने ऑन-रिक्‍वेस्‍ट ट्रांसफर पॉलिसी में बदलाव किया है. पूरी खबर अंदर पढ़ें.


Railway Transfer Policy: रेलवे में काम करने वाले रेलकर्मियों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है. अपने घर, होमटाउन, राज्‍य से दूर नौकरी कर रहे रेलकर्मी अब अपने घर के करीब नौकरी कर सकते हैं. उनका ट्रांसफर ऐसी जगह हो सकता है, जो उनके घर के पास हो. या फिर ऐसी जगह, जहां वो वर्षों से जाना चाहते थे, वहीं उन्‍हें पोस्टिंग मिल सकती है. जी हां, रेलकर्मियों के लिए रेलवे बोर्ड ने ऑन-रिक्‍वेस्‍ट ट्रांसफर पॉलिसी में महत्‍वपूर्ण बदलाव किया है. इसको लेकर रेलवे बोर्ड ने सभी जोन के महाप्रबंधकों (GM) को पत्र भेजकर जरूरी दिशानिर्देश जारी किए हैं. नई व्‍यवस्‍था के तहत हर महीने HRMS पोर्टल पर ट्रांसफर की योग्‍यता रखनेवाले कर्मचारियों की प्राथमिकता सूची जारी की जाएगी. 

पूर्व मध्‍य रेलवे में 23 साल से कार्यरत एक अनुभवी रेलकर्मी ने बताया कि देशभर में हजारों ऐसे रेल कर्मचारी हैं जो 20-22 साल या उससे ज्यादा भी, अपने घर से काफी दूर सेवा देने के बावजूद अपने घर के पास यानी गृह मंडल में ट्रांसफर का इंतजार करते रहते हैं और रिटायर भी हो जाते हैं. एक उम्र के बाद रेलकर्मियों को भी घर के पास पोस्टिंग की जरूरत होती है, ताकि जरूरत पड़ने पर वो घर पर भी समय बिता पाएं. रेलवे की इस पॉलिसी में बदलाव का उद्देश्‍य ऐसे कर्मियों को राहत देना है. 

किन रेलकर्मियों को मिलेगा मनचाहा ट्रांसफर? 

रेलवे ने दूर-दराज क्षेत्रों में वर्षों से काम कर रहे वैसे रेलकर्मियों के लिए ऑनरिक्वेस्ट ट्रांसफर पॉलिसी में बदलाव किया है जो 20 साल या उससे ज्‍यादा सेवा पूरी कर चुके हैं. यानी कम से कम 20 साल सर्विस कर चुके अराजपत्रित रेल कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर ट्रांसफर करने का फैसला लिया गया है.  

रेलवे के एक अधिकारी के मुताबिक नई व्यवस्था का उद्देश्य लंबे समय से अपने गृह मंडल या घर-परिवार के पास ट्रांसफर का इंतजार कर रहे रेल कर्मचारियों को राहत देना है. रेलवे बोर्ड के डिप्‍टी डायरेक्‍टर संजय कुमार ने सभी जोन के GMs को पत्र लिखकर दिशा-निर्देश दिए हैं.

ट्रांसफर के लिए HRMS पोर्टल पर जारी होगी लिस्‍ट!

नई व्यवस्था के तहत HRMS पोर्टल यानी ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम वेबसाइट पर हर महीने, 20 वर्ष+ सेवा दे चुके कर्मचारियों की अलग प्राथमिकता सूची जारी की जाएगी. इस लिस्‍ट में सबसे ज्‍यादा सर्विस कर चुके रेलकर्मी को सबसे पहले ट्रांसफर का मौका दिया जाएगा. 

नए सिस्‍टम की खासियत ये भी है कि ट्रांसफर स्वीकृत (Accept) होने के बाद किसी तरह के NOC यानी अनापत्ति प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं होगी. HRMS के माध्यम से ही ऑटोमैटिकली ट्रांसफर का आदेश जारी हो जाएगा.

ट्रांसफर ऑर्डर जारी होते ही 15 दिन में रिलीविंग 

पॉलिसी में बदलाव को लेकर बताया जा रहा है कि ट्रांसफर आदेश जारी होने के 15 दिनों के भीतर संबंधित रेलकर्मी की रिलीविंग यानी उन्हें कार्यमुक्त करना जरूरी होगा. 

बहुत जरूरी हुआ तो भी विशेष परिस्थिति में कर्मचारी को एक महीने से ज्‍यादा समय तक नहीं रोका जा सकेगा और उन्‍हें रोकने के लिए भी संबंधित DRM यानी मंडल के रेल प्रबंधक की स्वीकृति चाहिए होगी.  

रेलवे कर्मचारी संगठनों ने बोर्ड के इस फैसले का स्वागत किया है. बताया गया कि ट्रांसफर पॉलिसी में बदलाव की अधिसूचना, जारी होने के 2 महीने बाद से HRMS पोर्टल पर प्रभावी होगी. 

अदीना मस्जिद VS आदिनाथ मंदिरः बंगाल के मालदा में 653 साल पुरानी इमारत पर विवाद क्यों?

बंगाल के मालदा जिले में स्थित अदीना मस्जिद को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है. यहां आदिनाथ मंदिर होने का दावा करने वाले लोगों ने सावन में शिवलिंग की स्थापना और रुद्राभिषेक की तैयारी की है.

नई दिल्ली:

Adina Mosque Dispute Malda: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले की ऐतिहासिक अदीना मस्जिद एक बार फिर विवादों में है. 27 जुलाई से शुरू हो रहे सावन के महीने में 'आदिनाथ पुरातन शिव मंदिर समिति' ने मस्जिद से करीब 50 मीटर दूर स्थित एक मंदिर में लगभग 3.6 फीट ऊंचे और डेढ़ टन वजनी शिवलिंग की स्थापना और रुद्राभिषेक का कार्यक्रम घोषित किया है. समिति का दावा है कि वर्तमान अदीना मस्जिद की जगह पहले आदिनाथ शिव मंदिर था. सोशल मीडिया पर शिवलिंग स्थापना की बात सामने आने के बाद तनाव बढ़ने लगा है. 

मंदिर समिति ने कहा- कानूनी प्रक्रिया से आगे बढ़ेंगे

समिति का कहना है कि भविष्य में अदालत की अनुमति मिलने पर संरक्षित परिसर के भीतर भी शिवलिंग स्थापित करने की मांग की जाएगी. हालांकि समिति का कहना है कि वो केवल कानूनी प्रक्रिया के तहत ही आगे बढ़ेगी और किसी भी तरह की अवैध गतिविधि नहीं करेगी. 

अदीना मस्जिद VS आदिनाथ मंदिरः बंगाल के मालदा में 653 साल पुरानी इमारत पर विवाद क्यों?

पुरातत्व सर्वेक्षण का रिकॉर्ड- 1373 में सिकंदर शाह ने बनवाया मस्जिद

दूसरी ओर, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार अदीना मस्जिद का निर्माण 1373 ईस्वी में बंगाल सल्तनत के सुल्तान सिकंदर शाह ने कराया था और ये प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक है.

शिवलिंग स्थापना की तैयारी के बीच पुलिस ने जारी की एडवाइजरी

पुरातत्व सर्वेक्षण के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार 653 साल पुराने इस इमारत को विवाद गहरा गया है. सोशल मीडिया पर शिवलिंग स्थापना से जुड़े कार्यक्रम की जानकारी सामने आने के बाद मालदा पुलिस ने एडवाइजरी जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि संरक्षित स्मारक के भीतर बिना अनुमति किसी भी धार्मिक आयोजन, निर्माण या ढांचे में बदलाव की कोशिश कानून का उल्लंघन होगी और ऐसी स्थिति में सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

सोशल मीडिया पर अदीना मस्जिद के पास शिवलिंग होने का दावा किया जा रहा है.

सोशल मीडिया पर अदीना मस्जिद के पास शिवलिंग होने का दावा किया जा रहा है.

हुगली से शिवलिंग लाकर स्थापित करने की तैयारी

‘आदिनाथ पुरातन शिव मंदिर' समिति के सदस्यों ने हाल ही में संरक्षित स्मारक के पास पूजा-अर्चना की और घोषणा की कि हुगली जिले के तारकेश्वर से लाया गया 3.6 फुट ऊंचा और 1.5 टन वजन वाला शिवलिंग सावन के महीने के दौरान पास के एक मंदिर के अंदर स्थापित किया जाएगा.

संगठन ने अपने पुराने दावे को भी दोहराया कि मूल आदिनाथ मंदिर कभी उसी स्थान पर था जहां अब मस्जिद है. संगठन ने कहा कि वह अंततः संरक्षित स्मारक के अंदर शिवलिंग स्थापित करने के लिए कानूनी अनुमति मांगेगा.

अदीना मस्जिद VS आदिनाथ मंदिरः बंगाल के मालदा में 653 साल पुरानी इमारत पर विवाद क्यों?






मंदिर समिति के संरक्षक ने क्या कहा?

आदिनाथ पुरातन शिव मंदिर समिति के मुख्य संरक्षक और भाजपा नेता काजल गोस्वामी ने को बताया, “हम सोमवार को अपने मंदिर के अंदर पूजा करेंगे और शिवलिंग स्थापित करेंगे. वर्तमान मस्जिद के निर्माण के लिए मूल आदिनाथ मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया था. हम कानून का पालन करेंगे और कोई उपद्रव नहीं चाहते.”

उन्होंने कहा, “हम मस्जिद परिसर के अंदर शिवलिंग स्थापित करना चाहते हैं, लेकिन ऐसा उचित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करने और किसी सक्षम अदालत से अनुमति मिलने के बाद ही करेंगे. हम किसी भी गैर-कानूनी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे.”

अदीना मस्जिद VS आदिनाथ मंदिरः बंगाल के मालदा में 653 साल पुरानी इमारत पर विवाद क्यों?

गोस्वामी का दावा- मस्जिद परिसर में एक शिवलिंग सहित कई हिंदू और बौद्ध प्रतीक

समिति का दावा है कि मस्जिद परिसर से लगभग 100 मीटर की दूरी पर स्थित मौजूदा आदिनाथ मंदिर लगभग 120 साल पुराना है और मूल मंदिर के अवशेष एएसआई-संरक्षित स्मारक के अंदर मौजूद हैं. गोस्वामी ने आरोप लगाया कि मस्जिद परिसर के अंदर एक शिवलिंग के अलावा कई हिंदू और बौद्ध प्रतीक भी दिखाई देते हैं. 

पिछले साल सांसद यूसुफ पठान ने यहां का दौरा किया था, तब भी यह मामला उठा था.

पिछले साल सांसद यूसुफ पठान ने यहां का दौरा किया था, तब भी यह मामला उठा था.

सांसद यूसुफ पठान के दौरे से गरमाई थी राजनीति

यह मुद्दा पिछले साल चर्चा में आया था जब बहरामपुर के सांसद और पूर्व भारतीय क्रिकेटर यूसुफ पठान ने इस स्मारक का दौरा करके सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा की थीं. पश्चिम बंगाल भाजपा ने इसपर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दावा किया था कि यह मस्जिद नहीं बल्कि ऐतिहासिक आदिनाथ मंदिर था.

भाजपा के राज्यसभा सांसद समिक ने संसद में भी उठाया मामला

भाजपा के राज्यसभा सदस्य और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने संसद में इस मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाया था कि मस्जिद का निर्माण पहले से मौजूद हिंदू और बौद्ध ढांचों की सामग्रियों का उपयोग करके किया गया था. स्थानीय परंपराओं और ऐतिहासिक विवरणों का हवाला देते हुए, उन्होंने दावा किया कि इस स्थान पर मूल रूप से भगवान शिव और भगवान विष्णु को समर्पित आदिनाथ मंदिर था.

अदीना मस्जिद की दीवारों पर गणेश की प्रतिमा होने का दावा.

अदीना मस्जिद की दीवारों पर गणेश की प्रतिमा होने का दावा.

कलकत्ता हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर

इस वर्ष की शुरुआत में, कलकत्ता उच्च न्यायालय के समक्ष एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि एएसआई ने ढांचे में हिंदू देवी-देवताओं और प्रतीकों की कथित मौजूदगी के बावजूद संरक्षित स्मारक की पहचान गलत तरीके से अदीना मस्जिद के रूप में की थी.

मस्जिद के लिए मंदिर ध्वस्त किए जाने का दावा

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस स्थल को लेकर जनभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं. उन्होंने कहा, “राम मंदिर की तरह ही, इस मंदिर को भी मस्जिद बनाने के लिए कथित तौर पर ध्वस्त कर दिया गया था. इस स्थल से जुड़ी धार्मिक भावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, और ऐतिहासिक सच्चाई सामने आनी चाहिए.”

मालदा से 16 किमी दूर पांडुआ में स्थित है अदीना मस्जिद

मालदा शहर से लगभग 16 किलोमीटर उत्तर में पांडुआ में स्थित अदीना मस्जिद को 14वीं शताब्दी की भारत-इस्लामी वास्तुकला के सबसे बेहतरीन जीवित उदाहरणों में से एक माना जाता है. 260 पत्थर के खंभों और 387 गुंबददार मेहराबों वाले इस परिसर को कभी भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे बड़ी मस्जिद माना जाता था.

हालांकि एक भूकंप के कारण यह काफी क्षतिग्रस्त हो गई थी और 19वीं शताब्दी से वीरान पड़ी है, फिर भी यह स्मारक पश्चिम बंगाल के सबसे महत्वपूर्ण मध्यकालीन पुरातात्विक स्थलों में से एक बना हुआ है.

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बोले अभिजीत दीपके "झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए..."

अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर से कहा 'जब मैं अमेरिका से निकला था, तब कहा जा रहा था क्या होगा. लेकिन धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा.'हर दिन मुझसे सवाल पूछा जाता था कि इस्तीफा नहीं होगा. लेकिन सरकार झुक गई.

नई दिल्ली:

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अभिजीत दीपके का पहला रिएक्शन सामने आया है. प्रधान के इस्तीफे पर अभिजीत दीपके ने कहा कि झुकती है दुनिया बस झुकाने वाला चाहिए. CJP फाउंडर ने कहा, 'कहा जाता था कि इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते. लेकिन इस्तीफा हुआ है. कहते थे कब तक बैठोगे. 36 दिन हर दिन मुझसे सवाल पूछा जाता था कि इस्तीफा नहीं होगा. लेकिन सरकार झुक गई. क्या कहते थे कि क्रांति नहीं होगी. लेकिन क्रांति हो गई.' अभिजीत दीपके और उनके समर्थक दिल्ली के जंतर-मंतर पर धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे का जश्न मना रहे हैं. विरोध प्रदर्शन स्थल पर खुशी का माहौल है.

धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा-दीपके

अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर से कहा 'जब मैं अमेरिका से निकला था, तब कहा जा रहा था क्या होगा. लेकिन धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा.' अभिजीत दीपके और उनके साथी फिलहाल जंतर-मंतर पर जश्न मना रहे हैं. इससे पहले प्रधान ने इस्तीफा के साथ-साथ एक लेटर भी शेयर किया है. 

जंतर-मंतर पर खुशी से झूम उठे अभिजीत दीपके

कॉकरोच जनता पार्टी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर खुशी जताते हुए एक्स पर पोस्ट में लिखा- 'लोकतंत्र की जीत हुई'. इसके साथ ही दीपके का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह फोन पर बात करते खुशी से झूमते दिखाई दे रहे हैं. उनके आसपास जश्न का शोर सुना जा सकता है. वीडियो में देखा जा सकता है कि दीपके के हाथ में कैनुला लगा है.मंच से उन्होंने अपने समर्थकों को संबोधित भी किया. इस दौरान अन्य लोग भी मंच पर झूमते नजर आए. 

शिक्षा मंत्री ने पीएम मोदी को भेजा इस्तीफा

बता दें कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा पीएम मोदी को भेज दिया है. उन्होंने अपने इस्तीफे में कहा, देश-विरोधी तत्व जंतर-मंतर और पूरे देश में स्थिति का फायदा न उठा सकें, देश एकजुट रहे, भारत के छात्र कानूनी मुश्किलों में न फंसें और अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान दें, इसलिए मैंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा भेज दिया है.

NTA के DG,कभी CBSE के डायरेक्टर, जानें कौन हैं उच्च शिक्षा सचिव पद से हटाए गए विनीत जोशी

विनीत जोशी 1992 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. विनीत जोशी का जन्म 2 नवंबर, 1968 को उत्तर प्रदेश में हुआ था. विनीत ने IIT कानपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया है. अभी उन्हें पेपर लीक विवाद के बीच शिक्षा सचिव के पद से हटाया गया है.

NTA के DG,कभी CBSE के डायरेक्टर, जानें कौन हैं उच्च शिक्षा सचिव पद से हटाए गए विनीत जोशी

नई दिल्ली:

IAS Vineet Joshi: NEET पेपर लीक पर मचे बवाल के बीच बीती रात केंद्र सरकार ने शिक्षा सचिव पद से IAS विनीत जोशी को हटा दिया. विनीत जोशी 30 जून को संजय कुमार के रिटायर होने के बाद स्कूली शिक्षा सचिव का पद भी संभाल रहे थे. वह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के कार्यवाहक अध्यक्ष भी थे. विनीत जोशी का शिक्षा मंत्रालय से तबादला कर पंचायती राज मंत्रालय में सचिव के पद पर तैनात किया गया है. विनीत जोशी को शिक्षा सचिव पद से हटाए जाने, पेपर लीक पर फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन और अगले सप्ताह तक कड़े कानून बनाने के लिखित आश्वासन मिलने के बाद बीती रात सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त किया. पेपर लीक विवाद के बीच शिक्षा सचिव पद से हटाए गए IAS विनीत जोशी राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के पहले डायरेक्टर जनरल थे.

NTA के पहले DG थे विनीत जोशी, कई परीक्षा धांधली को लेकर सवाल

2017 में इंजीनियरिंग, मेडिकल सहित अन्य प्रवेश परीक्षाओं के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की स्थापना की गई थी. 2018 में विनीत जोशी को NTA का महानिदेशक नियुक्त किया गया था. 2021 तक विनीत जोशी एनटीए महानिदेशक के रूप में रहे. बीते कुछ साल में JEE, CUET, UGC, NEET की भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली को लेकर NTA लगातार सवालों के घेरे में है. 

नरेश कुमार गंगवार बनाए गए नए शिक्षा सचिव

विनीत जोशी शिक्षा विभाग से हटाए जाने के बाद नरेश कुमार गंगवार को नया उच्च शिक्षा सचिव बनाया गया है जबकि स्कूली शिक्षा सचिव की जिम्मेदारी टी.के. अनिल कुमार को दी गई है. गंगवार इससे पहले पशुपालन मंत्रालय में सचिव के पद पर तैनात थे, जबकि टीके अनिल कुमार ग्रामीण विकास मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव थे.

नीट पेपर लीक के आरोपों और CBSE की 12वीं कक्षा की परीक्षाओं में मूल्यांकन में गड़बड़ियों की वजह से गत दो महीने से शिक्षा मंत्रालय विवादों के केंद्र में रहा है. विनीत जोशी पहले राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के डायरेक्टर और CBSE के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. मणिपुर में 2023 में जातीय हिंसा शुरू होने से बिगड़ने के बाद उन्हें वहां का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया था.

कानपुर IIT से विनित जोशी ने किया है बीटेक 

विनीत जोशी 1992 बैच के आईएएस (IAS) अधिकारी हैं. विनीत जोशी का जन्म 2 नवंबर, 1968 को उत्तर प्रदेश में हुआ था. विनीत ने IIT कानपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया है. इसके अलावा उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड (IIFT) नई दिल्ली से इंटरनेशनल बिजनेस में MBA किया है. यहां वो गोल्ड मेडलिस्ट भी रहे. बाद में उन्होंने IIFT से क्वालिटी मैनेजमेंट में PhD भी की.

सीबीएसई में CCE प्रणाली की शुरुआत

सीबीएसई में विनीत जोशी के कार्यकाल में कई नए प्रयोग किए गए. फरवरी 2010 से नवंबर 2014 तक उनके लीडरशिप में सीबीएसई में सतत और व्यापक मूल्यांकन (CCE) प्रणाली की शुरुआत की गई थी. NTA के पहले महानिदेशक के रूप में उन्होंने NEET, JEE Main और CUET जैसी बड़ी परीक्षाओं को लागू करने में अहम भूमिका निभाई.

2023 में मणिपुर में भड़की हिंसा के समय विनीत जोशी को मणिपुर भेजा गया था. वहां उन्होंने मणिपुर सरकार में चीफ सेक्रेटरी की जिम्मेदारी संभाली थी. हालांकि बाद में उन्हें केंद्र में बुला लिया गया था. 

एक पति, तीन पत्नियां... यूपी के अमरोहा में सगी बहनों की अजब-गजब शादी, बोलीं- हम बहुत खुश

यूपी के अमरोहा में तीन सगी बहनों द्वारा एक ही युवक से शादी करने का मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में है. ट्रोलिंग के बीच तीनों बहनों और उनके पति ने कैमरे पर आकर कहा कि यह शादी उनकी मर्जी से हुई है और कोई फर्जी रील नहीं है.

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1 पति, 3 पत्नियां! अब सामने आया पूरा सच
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यूपी केअमरोहा के हसनपुर स्थित प्रसिद्ध मां चामुंडा मंदिर से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में एक युवक तीन युवतियों के साथ विवाह की रस्में निभाता दिखाई दे रहा है. वीडियो ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है. वीडियो में एक युवक तीन युवतियों के साथ अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लेता और उनकी मांग में सिंदूर भरता दिखाई दे रहा है. सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि तीनों युवतियां सगी बहनें हैं. 

शादी का वीडियो हुआ था वायरल

वीडियो में युवतियां यह कहते हुए नजर आती हैं कि वे बचपन से साथ रही हैं और अलग नहीं होना चाहती थीं, इसलिए उन्होंने एक ही युवक से विवाह करने का निर्णय लिया. वहीं युवक विकास उर्फ विक्कू भी वीडियो में तीनों को अलग न करने की बात कहता दिखाई देता है. बताया जा रहा है कि युवक और तीनों युवतियां साथ मिलकर यूट्यूब पर कंटेंट बनाते हैं. दूसरी ओर, मां चामुंडा मंदिर प्रशासन ने इस कथित विवाह की जानकारी होने से इनकार किया है. उनका कहना है कि जिस समय वीडियो बनाए जाने का दावा किया जा रहा है, उस दौरान मंदिर में सौंदर्यीकरण का कार्य चल रहा था और कोई पुजारी या कर्मचारी मौजूद नहीं था.

मामला यूपी के अमरोहा का है, जहां तीन सगी बहनों  सरोज, सावित्री और संतोष  ने एक ही शख्स से शादी की है. तीनों बहनें इंस्टाग्राम पर रील बनाती हैं और उनका पति विकास और विक्कू कैमरामान है. जानकारी के अनुसार विक्कू करीब 6 महीनों से वीडियोज में तीनों बहनों के पति का रोल निभाता था. लेकिन अब तीनों ने विक्कू से मंदिर में शादी कर ली. इन तीनों दुल्हनों की उम्र 18 से 21 साल है.



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