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डॉक्टर समरदीप पांडेय ने यशस्वी प्रधानमंत्री जी के जन्म दिन के उपलक्ष में सफाई कर्मचारी को अंग वस्त्र पहनाकर मोदी जी के स्वच्छता अभियान में सहयोग किया

डॉक्टर समरदीप पांडेय ने यशस्वी प्रधानमंत्री जी के जन्म दिन के उपलक्ष में सफाई कर्मचारी को अंग वस्त्र पहनाकर मोदी जी के स्वच्छता अभियान में सहयोग किया

डॉक्टर समरदीप पांडेय ने यशस्वी प्रधानमंत्री जी के जन्म दिन के उपलक्ष में सफाई कर्मचारी को अंग वस्त्र पहनाकर मोदी जी के स्वच्छता अभियान में सहयोग किया


आज जूही मंडल के मंडल मंत्री जनरल फिजिशियन डॉक्टर समरदीप पांडेय ने अपने मंडल के साथी कार्यकर्ताओं के साथ स्वच्छता अभियान चलाया।  शहीद मेजर अविनाश सिंह भदोरिया की प्रतिमा पर साफ सफाई करके मूर्ति पर माल्यार्पण किया एवं कर्मचारी को‌ अंग वस्त्र कर पहनाकर मिष्ठान खिलाकर सम्मानित किया। जिसमें उपस्थित रहे। भाजपा के वरिष्ठ नेता दिलीप सिंह, वरिष्ठ नेता राजेश श्रीवास्तव, वरिष्ठ नेता पंडित विकास दुबे, मंडल उपाध्यक्ष सुशील दीक्षित, ओबीसी मोर्चा उपाध्यक्ष नीटू यादव, समाजसेवी पंडित सतीश अवस्थी, महाराज सिंह, आशीष कश्यप, आदि लोग उपस्थित रहे।

 

मेहंदी क्या है और इसे कैसे लगाए

मेहँदी का इतिहास

मेहंदी जिसे हिना भी कहते हैं, दक्षिण एशिया में प्रयोग किया जाने वाला शरीर को सजाने का एक साधन होता है। 

इसे हाथों, पैरों, बाजुओं आदि पर लगाया जाता है। 1990 के दशक से ये पश्चिमी देशों में भी चलन में आया है।

मेहंदी का प्रचलन आज के इस नए युग में ही नहीं बल्कि काफी समय पहले से हो रहा है। आज भी सभी लड़कियां और औरतें इसे बड़े चाव से लगाती है, यहाँ तक की लड़कियां और औरतें ही नहीं कई पुरुष भी मेहंदी के बड़े शौकीन होते है हमारी भारतीय परंपरा में मेहंदी का प्रचलन काफी पुराने समय से होता आ रहा है, क्योंकि मेहंदी नारी श्रृंगार का एक अभिन्न अंग है जिसके बिना हर रीति-रिवाज अधुरा माना जाता है।

मेहंदी लगाने के लिये हिना नामक पौधे/झाड़ी की पत्तियों को सुखाकर पीसा जाता है। फिर उसका पेस्ट लगाया जाता है। कुछ घंटे लगने पर ये रच कर लाल-मैरून रंग देता है, जो लगभग सप्ताह भर चलता है।

2013 के एक अध्ययन के अनुसार, 4,000 से अधिक वर्षों से मेंहदी का उपयोग त्वचा (साथ ही बालों और नाखूनों) के लिए डाई के रूप में किया जाता रहा है।

भारतीय परंपरा में मेहंदी आमतौर पर हिंदू शादियों और त्योहारों जैसे करवा चौथ, वट पूर्णिमा, दिवाली, भाई दूज, नवरात्रि, दुर्गा पूजा और तीज के दौरान लगाई जाती है दक्षिण एशिया में मुसलमान मुस्लिम शादियों, ईद-उल-फितर और ईद-उल-जुहा जैसे त्योहारों के दौरान भी मेहंदी लगाते हैं। 

हिना एक झाड़ी है जो अफ्रीका, उत्तरी ऑस्ट्रेलिया और दक्षिणी एशिया के उष्णकटिबंधीय जलवायु में उगती है, और कई प्राचीन ग्रंथों में इसका उल्लेख मिलता है। इस जड़ी बूटी को कैंफायर कहा जाता है। मेहंदी संस्कृत शब्द मेंधिका से ली गई है, जबकि हिना की उत्पत्ति लॉसनिया इनर्मिस, हिना के अरबी नाम से हुई है। हिना के पौधे की पत्तियों में एक लाल-नारंगी अणु, लॉसन होता है, जिसमें त्वचा, बाल और नाखूनों को अस्थायी रूप से दागने की क्षमता होती है। हेयर डाई और टैटू के सौंदर्य की .....






दुनिया में अपनी पहचान बनाने से पहले, हिना के पत्तों को सुखाकर पाउडर बनाया जाता था, पेस्ट में मिलाया जाता था और कई तरह की तकनीकों का उपयोग करके लगाया जाता था। इस पौधे को अन्य पौधों, जैसे कि इंडिगो की पत्तियों के साथ मिलाकर विभिन्न रंग प्राप्त किए जा सकते हैं। स्थान और उपलब्धता के आधार पर, चाय, कॉफी, लौंग, इमली, नींबू, चीनी और विभिन्न तेलों जैसी विभिन्न सामग्रियों का उपयोग डिज़ाइन के रंग और दीर्घायु को बढ़ाने के लिए भी किया जाता है।

मेहंदी लगाने का पहला तरीका

डिज़ाइन को अपने सामने रखें क्योंकि उंगलियां आपके पास होंगी और कलाई दूर । इस स्थिति का कारण यह है कि जब भी आप किसी के हाथ पर मेहंदी लगाएंगे तो आप कभी भी उंगलियों से शुरुआत नहीं करेंगे क्योंकि वे आपके करीब होंगी। आपको सबसे दूर से शुरू करके सबसे नजदीक तक आना होगा।

ऐसे में क्यों न कुछ ऐसी मेहंदी टिप्स और ट्रिक्स की बात कर ली जाए जो आप लोगों के लिए सुविधाजनक साबित हों और आपकी मेहंदी सबसे अलग लगे। तो चलिए जानते हैं कुछ ऐसे ही ट्रिक्स।अगर आपको झटपट मेहंदी लगानी है और कोई हल्की-फुल्की डिजाइन सूझ नहीं रही है तो S और O ट्रिक काफी काम की साबित हो सकती है। दरअसल, इस ट्रिक में हम किसी मेन लाइन के आस-पास S और O बनाते हैं। आप पूरे हाथ में सीधी लकीर खींच सकते हैं, सांप जैसी लकीर खींच सकते हैं, हाथ के किसी हिस्से में कोई आर्क बना सकते हैं और बस उसके साइड में S-O बना लीजिए। 

S और O ट्रिक   अगर आपको झटपट मेहंदी लगानी है और कोई हल्की-फुल्की डिजाइन सूझ नहीं रही है तो S और O ट्रिक काफी काम की साबित हो सकती है। दरअसल, इस ट्रिक में हम किसी मेन लाइन के आस-पास S और O बनाते हैं। आप पूरे हाथ में सीधी लकीर खींच सकते हैं, सांप जैसी लकीर खींच सकते हैं, हाथ के किसी हिस्से में कोई आर्क बना सकते हैं और बस उसके साइड में S-O बना लीजिए। अब S को क्रिएटिविटी दिखाते हुए लाइन से जोड़ें, आप इसमें बेल, पान का डिजाइन, मोर, कुछ भी बना सकते हैं। इसके बाद O को अलग-अलग डिजाइन्स से भर दीजिए। आपकी मेहंदी झटपट तैयार हो जाएगी। 

प्रोफेशनल मेहंदी आर्टिस्ट बहुत सारे तरीकों का इस्तेमाल करते हैं और कोन पीछे के साइड से पकड़ते हैं, लेकिन अगर आप नई-नई मेहंदी लगा रहे हैं तो इसे पेन की तरह पकड़ना आसान होगा। ये सारे ट्रिक्स उन लोगों के लिए अच्छे साबित हो सकते हैं जिन्हें मेहंदी लगाने में दिक्कत होती है। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी हो तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से। 

S से बनाएं मोर या पान का डिजाइनमेहंदी में लेटर S बहुत मायने रखता है जो आपकी पूरी हथेली को भरने के काम आ सकता है। आप बस अपनी हथेली पर बड़ा सा S बनाएं और फिर निचले छोर को एक आर्क (बैक साइड) की मदद से ऊपरी छोर से जोड़ने की कोशिश कीजिए। आपका काम बहुत ही आसान हो जाएगा और आपको मोर या फिर पान डिजाइन का परफेक्ट शेप मिल जाएगा। अगर मोर बना रही हूं तो ऊपरी छोर तक आते-आते एक सिर बनाने की कोशिश करें।


इयरबड का करें इस्तेमाल

आप मेहंदी लगाते समय कई घरेलू चीज़ों का इस्तेमाल कर सकती हैं जैसे इयरबड। आप अपने हाथ पर मीडियम साइज के डॉट्स बना लें। जो भी डिजाइन आपको अच्छी लगे वैसे ही डॉट्स बनाएं और फिर इयरबड्स की मदद से उसे ग्रेडिएंट इफेक्ट दे दें। ये बहुत ही आसान ट्रिक है जो झटपट मेहंदी लगाने के बहुत काम आएगी।


सिक्के और चूड़ी का करें इस्तेमाल

आप मेहंदी लगाते समय सिक्के और चूड़ी का इस्तेमाल कर परफेक्ट गोलाकार बना सकते हैं। बड़े सर्कल बनाने हों तो चूड़ी का इस्तेमाल करें और छोटे सर्कल बनाने हों तो सिक्के का इस्तेमाल करें। डॉट वाली मेहंदी लगाने के लिए भी आप यही ट्रिक इस्तेमाल कर सकते हैं। 


पूरी मेहंदी को डेंस लुक देने के लिए एक ही जैसी डिजाइन

अगर आप ये चाहती हैं कि आपके हाथ में भरी हुई मेहंदी लगे और आप हथेली पर बेसिक डिजाइन बना चुकी हैं तो बस उस बेसिक डिजाइन को आउटलाइन करें और फिर एक ही जैसी डिजाइन से (चाहे वो डॉट्स से हो, चाहे वो कोई फूल की डिजाइन हो, चाहे वो कोई इंटेंस डिजाइन हो) आप पूरे हाथ को भर दीजिए। 


उंगलियों की आसान डिजाइन

उंगलियां हथेलियों से अलग होती हैं इसलिए इनमें डिजाइन की तकनीक भी अलग होती है। सबसे आसान ये होता है कि जिस तरह उंगलियां तीन हिस्सों में बटी होती हैं वैसे ही आप छोटी-छोटी तीन डिजाइन इनमें भर दें। ऐसे में आपकी मेहंदी स्टाइलिश भी दिखेगी और साथ ही साथ उंगलियां अलग-अलग करने पर भी डिजाइन खराब नहीं लगेगी। 


सबसे पहले करें आउटलाइन तैयार

आपके लिए सबसे आसान तरीका ये होगा कि मेहंदी की आउटलाइन तैयार कर ली जाए। जो भी बेसिक डिजाइन आपको बनानी है उसका ढांचा तैयार करें जैसे कैरी, पान, पत्ती, फूल, मोर आदि मेहंदी में बनाएं और फिर उसे एक जैसी डिजाइन से भर दें। इस ट्रिक से आउटलाइन हमेशा बोल्ड दिखेगी और मेहंदी का लुक अच्छा आएगा। 

अगर कोई और आपकी मेहंदी देख रहा है तो बैक डिजाइन पहले दिखेगी और फ्रंट बाद में। ऐसे में आपको पीछे के साइड की मेहंदी पर ध्यान ज्यादा देना है। सबसे आसान तरीका ये होगा कि आप उंगलियों पर आसान डिजाइन चुनें और नीचे की ओर थोड़ी भरी हुई डिजाइन। ये लोगों का ध्यान आकर्षित करने में आपकी मदद जरूर करेगी। 

हर डिजाइन की बाउंड्री लाइन बहुत जरूरी है। भले ही आपका हाथ हिल रहा हो और मेहंदी की डिजाइन सही न बने, लेकिन अगर आप सबकी आउटलाइन कर देंगे तो मेहंदी ज्यादा डिफाइन नजर आएगी। 


पीछे की मेहंदी लगाते समय रखें ध्यान

अगर कोई और आपकी मेहंदी देख रहा है तो बैक डिजाइन पहले दिखेगी और फ्रंट बाद में। ऐसे में आपको पीछे के साइड की मेहंदी पर ध्यान ज्यादा देना है। सबसे आसान तरीका ये होगा कि आप उंगलियों पर आसान डिजाइन चुनें और नीचे की ओर थोड़ी भरी हुई डिजाइन। ये लोगों का ध्यान आकर्षित करने में आपकी मदद जरूर करेगी। 


हर डिजाइन की बाउंड्री लाइन जरूरी है

हर डिजाइन की बाउंड्री लाइन बहुत जरूरी है। भले ही आपका हाथ हिल रहा हो और मेहंदी की डिजाइन सही न बने, लेकिन अगर आप सबकी आउटलाइन कर देंगे तो मेहंदी ज्यादा डिफाइन नजर आएगी। 

https://www.instagram.com/p/DAGvbRUvywk/?igsh=dm91Y3dpaW8yNGd1



 

छुट्टियों में खेल भी पढ़ाई भी बच्चे नहीं होंगे बोर,

छुट्टियों में खेल भी पढ़ाई भी बच्चे नहीं होंगे बोर, 

बच्चों की गर्मी की छुट्टियां जल्द शुरू होने वाली हैं। ऐसे में पढ़ाई से जुड़ाव बना रहे इसके साथ ही जरूरी है कि वह कुछ नया भी सीखें। स्कूल न जाने से बच्चों के पास बहुत सा फ्री टाइम होता है, जिसमें वह कई एक्टिविटी कर सकते हैं। चलिए आज हम आपको बताते हैं कि आप गर्मी की छुट्टियों में बच्चों को कौन-कौन से इंटरेस्टिंग कोर्स करवा सकती हैं।


आर्ट एंड क्राफ्ट कोर्स


1)आर्ट एंड क्राफ्ट कोर्स

आपके बच्चे को ड्राइंग या फिर कलरिंग करना बहुत पसंद है तो आप उन्हें पेंटिंग या क्रॉफ्ट की ऑनलाइन क्लासेस में एडमिशन दिला सकती हैं। इससे उनकी स्किल्स इंप्रूव होगी और वह अपनी छुट्टियों में इस काम को करके खुश भी होंगे।

फॉरेन लैंग्वेज से जुड़ा कोर्स


2)फॉरेन लैंग्वेज से जुड़ा कोर्स

बच्चों की सीखने की क्षमता बचपन में सबसे अधिक होती है। कोई नई भाषा सीखने में भी गर्मी की छुट्टियां का इस्तेमाल किया जा सकता है। बच्चे के इंट्रेस्ट के हिसाब से उसे फ्रेंच, जर्मन या दूसरी कोई भाषा क्लास ज्वाइन करा सकती हैं। इसके अलावा आप अपने बच्चों को चेस या फिर क्रिकेट खेलना भी सिखा सकती हैं।आप बच्चों को हिंदी या इंग्लिश में बात करना, फ्रेंड ग्रुप में सभी के सामने बोलना, ग्रामर ठीक करना जैसे बहुत सी चीजें सिखा सकती हैं। इसके साथ ही अगर आपके बच्चे का मैथ्स या कोई अन्य सब्जेक्ट बेस कमजोर है तो बच्चों को आप ऑनलाइन क्लासेस या ऐसी एक्टिविटीज करवा सकती हैं जिससे उनके बेसिक क्लियर हो सकें।

स्टोरी रीडिंग कोर्स

3)स्टोरी रीडिंग कोर्स

आप अपने बच्चों को स्टोरी रीडिंग या राइटिंग कोर्स करवा सकती हैं। इसके माध्यम से वह उनकी रीडिंग की हैबिट भी बढ़ती है और उनकी वोकैबुलरी भी अच्छी होती है। आप बच्चों को गर्मी की छुट्टियों में स्विमिंग भी सिखा सकती हैं। इसके अलावा अगर आप चाहें तो गार्डिंग भी बच्चों को सिखा सकते हैं । गार्डनिंग एक ऐसा काम है, जिससे सुकून मिलता है और मन प्रसन्न होता है। यह बच्चों को प्रकृति से जोड़ने का सबसे अच्छा तरीका है इसके साथ ही बच्चे गार्डनिंग से पर्यावरण और स्वच्छता के बारे में भी सीखते है।

उपरोक्त सभी तरीकों से बच्चों की गर्मी की छुट्टियां शानदार बन सकती हैं। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें और कमेंट करके अपनी राय बताएं। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें हर जिंदगी के साथ।

 

बुराई जड़ से हटानी चाहिए (चाणक्य और कुश)

बुराई जड़ से हटानी चाहिए (चाणक्य और कुश)

एक बार चाणक्य अपने शिष्यों के साथ सम्राट चन्द्रगुप्त से राजकाज सम्बन्धी कार्यों के लिए मिलने जा रहे थे. रास्ते में एक मैदान था जिसमें एक विशेष प्रजाति कुश नामक घास उगी हुई थी. चाणक्य जब उस मैदान से गुजर रहे थे तब कुश का तीखा और नुकीला सिरा उनके पांव में चुभ गया. उनके मुंह से आह निकल गयी. 

चाणक्य ने नीचे झुककर उस घास को देखा और फिर अपने शिष्यों से कुदाल मंगवाई और फिर स्वयं अकेले ही अपने हाथों से मैदान की सारी घास को उखाड़ना शुरू कर दिया. जब सारी घास उखड़ गयी तो चाणक्य ने कुश घास की जड़ों को भी निकालकर जला दिया. तत्पश्चात उन्होंने अपने शिष्यों से मठ्ठा (कच्चा घी जो छाछ बिलो कर निकाला जाता है) मंगवाया और सारी जमीन को उससे सींच दिया ताकि कुश फिर कभी ना पनप सके और किसी राहगीर को कष्ट ना पहुंचा सके. 

यह सब देखकर एक शिष्य ने जिज्ञासावश चाणक्य से पूछा, ‘ गुरूजी, इस नुकीली घास को निकालने के लिए आपने खुद इतनी मेहनत क्यों की ? आपने हमें आदेश दिया होता, हम शीघ्र ही यह कार्य कर देते. ‘ 

चाणक्य यह सुनकर मुस्कुराये और बोले, ‘ तुम सबको एक शिक्षा देने के लिए ही मैंने यह कार्य स्वयं किया है. यह करके मैं तुम सबको यह सिखाना चाहता हूँ कि बुराई को हमेशा जड़ से खत्म किया जाना चाहिए. जब तक हम ऐसा नहीं करेंगे तो बुराई कभी ना कभी किसी ना किसी को अपनी चपेट में लेती ही रहेगी. इसलिए बुराई को सिर्फ दूर नहीं करना चाहिए बल्कि इसे जड़मूल से समाप्त कर देना चाहिए, ताकि यह वापस कभी ना पनप सके.’

                                         

फ्यूज_बल्ब -लघु कथा    


शहर लखनऊ में बसे उपनगर गोमती नगर में एक बड़े आईएएस अफसर रहने के लिए आए जो हाल ही में सेवानिवृत्त हुए थे।‌ 

ये बड़े वाले रिटायर्ड आईएएस अफसर हैरान परेशान से रोज शाम को पास के पार्क में टहलते हुए अन्य लोगों को तिरस्कार भरी नज़रों से देखते और किसी से भी बात नहीं करते थे। 

एक दिन एक बुज़ुर्ग के पास शाम को गुफ़्तगू के लिए बैठे और फिर लगातार उनके पास बैठने लगे लेकिन उनकी वार्ता का विषय एक ही होता था - मैं इतना बड़ा आईएएस अफ़सर था कि पूछो मत, यहां तो मैं मजबूरी में आ गया हूं। मुझे तो दिल्ली में बसना चाहिए था और वो बुजुर्ग प्रतिदिन शांतिपूर्वक उनकी बातें सुना करते थे। परेशान होकर एक दिन जब बुजुर्ग ने उनको समझाया - आपने कभी फ्यूज बल्ब देखे हैं? बल्ब के फ्यूज हो जाने के बाद क्या कोई देखता है‌ कि‌ बल्ब‌ किस कम्पनी का बना‌ हुआ था या कितने वाट का था या उससे कितनी रोशनी या जगमगाहट होती थी? 

बल्ब के‌ फ्यूज़ होने के बाद इनमें‌‌ से कोई भी‌ बात बिलकुल ही मायने नहीं रखती है। लोग ऐसे‌ बल्ब को‌ कबाड़‌ में डाल देते‌ हैं। है‌ कि नहीं? फिर जब उन रिटायर्ड‌ आईएएस अधिकारी महोदय ने सहमति‌ में सिर‌ हिलाया तो‌ बुजुर्ग फिर बोले‌ - रिटायरमेंट के बाद हम सब की स्थिति भी फ्यूज बल्ब जैसी हो‌ जाती है‌। हम‌ कहां‌ काम करते थे‌, कितने‌ बड़े‌/छोटे पद पर थे‌, हमारा क्या रुतबा‌ था,‌ यह‌ सब‌ कुछ भी कोई मायने‌ नहीं‌ रखता‌। मैं सोसाइटी में पिछले कई वर्षों से रहता हूं और आज तक किसी को यह नहीं बताया कि मैं दो बार संसद सदस्य रह चुका हूं। वो जो सामने वर्मा जी बैठे हैं, रेलवे के महाप्रबंधक थे। 

वे सामने से आ रहे सिंह साहब सेना में ब्रिगेडियर थे। वो मेहरा जी इसरो में चीफ थे। ये बात भी उन्होंने किसी को नहीं बताई है, मुझे भी नहीं पर मैं जानता हूं सारे फ्यूज़ बल्ब करीब - करीब एक जैसे ही हो जाते हैं, चाहे जीरो वाट का हो या 50 या 100 वाट हो। कोई रोशनी नहीं‌ तो कोई उपयोगिता नहीं। उगते सूर्य को जल चढ़ा कर सभी पूजा करते हैं। पर डूबते सूरज की कोई पूजा नहीं‌ करता‌। कुछ लोग अपने पद को लेकर इतने वहम में होते‌ हैं‌ कि‌ रिटायरमेंट के बाद भी‌ उनसे‌ अपने अच्छे‌ दिन भुलाए नहीं भूलते। वे अपने घर के आगे‌ नेम प्लेट लगाते‌ हैं - रिटायर्ड आइएएस‌/रिटायर्ड आईपीएस/रिटायर्ड पीसीएस/ रिटायर्ड जज‌ आदि - आदि। अब ये‌ रिटायर्ड IAS/IPS/PCS/तहसीलदार/ पटवारी/ बाबू/ प्रोफेसर/ प्रिंसिपल/ अध्यापक कौन-सी पोस्ट होती है भाई? माना‌ कि‌ आप बहुत बड़े‌ आफिसर थे‌, बहुत काबिल भी थे‌, पूरे महकमे में आपकी तूती बोलती‌ थी‌ पर अब क्या? अब यह बात मायने नहीं रखती है बल्कि मायने‌ रखती है‌ कि पद पर रहते समय आप इंसान कैसे‌ थे...आपने‌ कितनी जिन्दगी‌ को छुआ...आपने आम लोगों को कितनी तवज्जो दी...समाज को क्या दिया...कितने लोगों की मदद की...पद पर रहते हुए कभी घमंड आये तो बस याद कर लीजिए कि एक दिन सबको फ्यूज होना है।

यह पोस्ट उन लोगों के लिए आईना है जो पद और सत्ता होते हुए कभी अपनी कलम से समाज का हित नहीं कर सकते। और रिटायरमेंट होने के बाद समाज के लिए बड़ी चिंता होने लगती है। 

अभी भी वक्त है इस पोस्ट को पढ़िए और चिंतन करिए तथा समाज का जो भी संभव हो हित करिए तथा सभी को एक नेक शिक्षा देने का कार्य कीजिए।

✍️लेखक अज्ञात



मिथिलेश क्लीनिक के संचालक डॉक्टर समर दीप पांडेय ने सांसद प्रत्याशी रमेश अवस्थी का कैलेंडर वितरित किया

 *मिथिलेश क्लीनिक के संचालक डॉक्टर समर दीप पांडेय ने सांसद प्रत्याशी रमेश अवस्थी का कैलेंडर वितरण कर जनसंपर्क किया।* गोविंद नगर एस ब्लॉक स्थित मिथिलेश क्लीनिक के संचालक जूही मंडल किसान मोर्चा के मंडल महामंत्री‌‌ डॉक्टर समरदीप पांडेय अपनी क्लीनिक पर कानपुर लोकसभा प्रत्याशी रमेश अवस्थी का कैलेंडर वितरण कर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की कुशल कार्यशैली बताकर भाजपा के पक्ष में ज्यादा से ज्यादा मतदान करने की अपील की। और कहा की लोकसभा चुनाव चौथे चरण का मतदान 13 मई सोमवार को होना है। एक अच्छी सरकार चुनने के लिए हमें एक बार फिर से मौका मिल रहा है । इसलिए इस मौके का फायदा सभी मतदाताओं को उठाना चाहिए। मताधिकार हमारी सबसे बड़ी ताकत है। हमें मजबूत लोकतंत्र के लिए मतदान अवश्य करना चाहिए। 13 मई को बिना किसी लालच व डर के मतदान केन्द्रो में जाकर अपना मतदान करें

BJP कानपुर के सांसद प्रत्याशी रमेश अवस्थी के समर्थन में भाजपा जूही मंडल किसान मोर्चा

 आज भारतीय जनता पार्टी कानपुर के सांसद प्रत्याशी रमेश अवस्थी के समर्थन में भाजपा जूही मंडल किसान मोर्चा के सभी पदाधिकारी ने भाग लेकर उन्हें भारी मतों से जीत दिलाने के लिए जनता से अपील कीl कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर जनसंपर्क किया l जनसंपर्क पीले पुल से प्रारंभ होकर चरण सिंह कॉलोनी होते हुए जूही लाल कॉलोनी अंबेडकर नगर पर इसका समापन हुआ l जनसंपर्क में पूर्व विधायक अजय कपूर वरिष्ठ नेता विकास दुबे पार्षद नवीन पंडित किसान मोर्चा जिला कार्यकारिणी सदस्य अवध बिहारी अवस्थी समाजसेवी अक्षय मिश्रा मंडल अध्यक्ष जसपाल भगत वार्ड अध्यक्ष विनय मालवी पंकज शर्मा अनिल माथुर सुनील नारंग राजेश श्रीवास्तव भारतीय जनता पार्टी के बहुत से पदाधिकारी गण एवं क्षेत्र जनता उपस्थित रहि। *डॉक्टर समरदीप पांडेय मंडल महामंत्री भाजपा किसान मोर्चा जूही मंडल*

आज लोगों को बहुत गर्मी लग रही है, कल के लिए दो पेड़ जरूर लगाएं,

आज पर्यावरण एक जरूरी सवाल ही नहीं बल्कि एक ज्वलंत मुद्दा है

आज लोगों को बहुत गर्मी लग रही है, लेकिन कब तक एसी का सहारा लेंगे, आज पूरे भारत में 300 करोड़ पेड़ों की जरूरत है।  यह कुछ ही समय में 45°C से 49°C और 55°C से 60°C तक पहुंच जाता है। 56°C में इंसानों का जीवित रहना मुश्किल होगा।  हमें अभी से पौधे लगाने हैं;  क्योंकि एक पेड़ को काफी बड़ा होने में पांच से सात साल लग जाते हैं। बारिश जल्द ही आने वाली है, दो पेड़ जरूर लगाएं, सब कुछ सरकार पर न छोड़ें। पेड़ आपके पर्यावरण को प्रदूषण से मुक्त रखेंगे साथ ही आपको आर्थिक और समृद्ध बनने में भी मदद करेंगे।

आज पर्यावरण एक जरूरी सवाल ही नहीं बल्कि ज्वलंत मुद्दा बना हुआ है लेकिन आज लोगों में इसे लेकर जागरूकत है। ग्रामीण समाज को छोड़ दें तो भी महानगरीय जीवन में इसके प्रति खास उत्सुकता नहीं पाई जाती। परिणामस्वरूप पर्यावरण सुरक्षा महज एक सरकारी एजेण्डा ही बन कर रह गया है। जबकि यह पूरे समाज से बहुत ही घनिष्ठ सम्बन्ध रखने वाला सवाल है। जब तक इसके प्रति लोगों में एक स्वाभाविक लगाव पैदा नहीं होता, पर्यावरण संरक्षण एक दूर का सपना ही बना रहेगा।



लोग अपने आस पास के आवरण को नष्ट करने का हर संभव प्रयास में लगे हुए है पर्यावरण की सुरक्षा तो सिर्फ दिमाग मे ही है।नगरीकरण तथाऔद्योगीकरण के कारण पर्यावरण का अधिक से अधिक दोहन हो रहा है और इसका सीधा परिणाम यही निकल कर आ रहा है कि पर्यावरण का संतुलन विगड़ता जा रहा है जिससे कहीं सूखा कही अतिवृष्टि जैसी समस्याएं उत्पन्न होती जा रही है। जो जमीन कल तक उपजाऊ थी आज देखा जाए तो उसमें अच्छी फसल नही होती और ऐसा प्रतीत होता है कि आने वाले समय मे यह बंजर हो जाएगी। हमे प कही जाने वाली हमारी पृथ्वी एक दिन बन्जर होकर रह जायेगी और इससे जीवन समाप्त हो जाएगा और यह फिर से वही आकाश पिण्ड का गोला बनकर रह जायेगी।


RTI एक्टिविस्ट कैसे बनें

 

आरटीआई कार्यकर्ता (एक्टिविस्ट) कैसे बन सकते हैं?

-: सूचना का अधिकार :-
मुख्य रूप से भ्रष्टाचार के खिलाफ 2005 में एक अधिनियम लागू किया गया जिसे सुचना का अधिकार यानी RTI कहा गया. इसके अंतर्गत कोई भी नागरिक किसी भी सरकारी विभाग से कोई भी जानकारी ले सकता है बस शर्त यह है की RTI के तहत पूछी जाने वाली जानकारी तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए. यानि हम किसी सरकारी विभाग से उसके विचार नही पूछ सकते. जैसे आप के ईलाके में विकास के कामो के लिए कितने पैसे खर्च हुए है और कहाँ खर्च हुए है, आपके इलाके की राशन की दुकान में कब और कितना राशन आया, स्कूल, कॉलेज और हॉस्पिटल में कितने पैसे खर्च हुए है जैसे सवाल आप सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत पता कर सकते है.

प्रयोग एवं फायदे :
1.कोई भी नागरिक, किसी भी सरकारी विभाग से जानकारी प्राप्त कर सकता है
2.ये अधिकार एक आम नागरिक के पास है जो सरकार के काम या प्रशासन में और भी पारदर्शिता लाने का काम करता है.
3.भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा कदम है.
4.इस अधिकार का उपयोग हम किसी भी सरकारी विभाग की राय जानने के लिए नही कर सकते. इसका उपयोग हम तथ्यों की जानकारी पाने के लिए कर सकते है. जैसे, “डिस्पेंसरी में कितनी दवाइयां आती है, पार्क और साफ़ सफाई में कितना खर्च हुआ, किसी सरकारी दफ्तर में कितनी नियुक्तियां हुई?” इसके अलावा “ सड़क बनाने के लिए कितने पैसे आये और कहा पर खर्च हुए?”
5.सभी गवर्मेंट डिपार्टमेंट, प्रधानमंत्री, मुख्यमत्री, बिजली कंपनियां, बैंक, स्कूल, कॉलेज, हॉस्पिटल, राष्ट्रपति, पुलिस, बिजली कंपनियां, RTI act के अन्दर आते है.

6. लोगो ने RTI के इस्तेमाल से कई ऐसी जानकारी हासिल की है जिससे उनकी रोजमर्रा की समस्याए सुलझ गई है.
7. सरकार की सुरक्षा से सम्बंधित जानकारी या गोपनीय जानकारी इस अधिकार के अंतर्गत नही आती.

कैसे प्राप्त करे जानकारी?
1. हर सरकारी विभाग में जन सुचना अधिकारी होता है. आप अपने आवेदन पत्र उसके पास जमा करवा सकते है.
2. आवेदन पत्र का फॉर्मेट इन्टरनेट से डाउनलोड कर सकते है या फिर एक सफ़ेद कागज पर अपना आवेदन(एप्लीकेशन) लिख सकते है जिसमे जन सुचना अधिकारी आपकी मदद करेगा.
3. RTI की एप्लीकेशन आप किसी भी भारतीय भाषा जैसे हिंदी, इंग्लिश या किसी भी स्थानीय भाषा में दे सकते हैं
4. अपने आवेदन पत्र की फोटो कॉपी करवा कर जन सुचना अधिकारी से रिसीविंग जरुर ले ले.
5. https://rtionline.gov.in/ इस साईट पर जा कर केंद्र सरकार के किसी भी विभाग से जानकारी प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन आवेदन भी कर सकते है.

6. आवेदन पत्र डालने के ३० दिन के अन्दर आपको जवाब मिल जाएगा
7. यदि ऐसा नही होता है तो आप कार्ट में अपील कर सकते है
8. किसी भी सरकारी विभाग से जानकारी प्राप्त करने के लिए आवेदन पत्र के साथ 10/- रूपये की फीस है
9. ये फीस गरीबी रेखा से नीचे के लोगो के लिए माफ़ है.

सामाजिक सेवा और सामुदायिक संगठन: एक साझा दिशा

सामाजिक सेवा और सामुदायिक संगठन दोनों ही समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये दोनों अलग-अलग होते हैं, लेकिन उनका मिलन समाज में सकारात्मक परिणामों को उत्पन्न करता है। इस लेख में हम समझेंगे कि सामाजिक सेवा और सामुदायिक संगठन के मिलन से कैसे समाज में विकास का मार्ग प्रशस्त होता है।


7. शिक्षा और सामाजिक सेवा: नया दिशा


शिक्षा और सामाजिक सेवा एक-दूसरे के अद्वितीय साथी होते हैं जो समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षा के माध्यम से समाज के सदस्यों को संवेदनशीलता और समाज सेवा के महत्व को समझाया जा सकता है, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।


8. सामाजिक सेवा के माध्यम से आर्थिक स्थिरता


सामाजिक सेवा न केवल सामाजिक समाधान प्रदान करती है, बल्कि यह लोगों को आर्थिक स्थिरता भी प्रदान करती है। उदाहरण के लिए, आजकल कई सामाजिक संगठन गरीब और असहाय लोगों को आर्थिक सहायता प्रदान करते हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होती है।


9. सामाजिक सेवा और सांस्कृतिक संरक्षण


सामाजिक सेवा और सांस्कृतिक संरक्षण एक-दूसरे को पूरकांतर बनाते हैं। समाजिक सेवा के माध्यम से हम अपने समाज की आर्थिक, सामाजिक, और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रख सकते हैं और उसे विकसित कर सकते हैं।


10. सामाजिक सेवा और पर्यावरण संरक्षण


सामाजिक सेवा और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक होते हैं। सामाजिक सेवा के माध्यम से हम पर्यावरण की सफाई और संरक्षण के लिए जागरूकता फैला सकते हैं और लोगों को पर्यावरण संरक्षण में भागीदार बना सकते हैं।

 



सामाजिक सेवा: समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान

 सामाजिक सेवा एक महत्वपूर्ण गतिविधि है जो समाज के सभी वर्गों की मदद करती है। इसका मुख्य उद्देश्य समाज के उत्थान और विकास में सहायता करना है। इसलिए, हमें सामाजिक सेवा के महत्व को समझना और उसमें सहयोग करना चाहिए।


2. युवा और सामाजिक सेवा: एक सकारात्मक योगदान


युवा वर्ग समाज के नेतृत्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्हें सामाजिक सेवा में भाग लेने के माध्यम से समाज के उत्थान में मदद करने का महत्वपूर्ण योगदान देना चाहिए। यह उनके स्वयं के भले के साथ-साथ समाज के भले के लिए भी उत्तम होता है।


3. महिलाओं और सामाजिक सेवा: समाज के निर्माण में अग्रणी भूमिका


महिलाएं समाज की रीढ़ होती हैं और उनके सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण अंग है। सामाजिक सेवा में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान करती है।


4. ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक सेवा: विकास की दिशा में कदम


ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक सेवा विकास की मुख्य दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे ग्रामीण समुदायों को आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक रूप से सशक्त किया जा सकता है।


5. जनहित में जारी: सामाजिक सेवा के महत्व


सामाजिक सेवा महत्वपूर्ण है क्योंकि यह समाज में संतुलन और सहानुभूति को बढ़ावा देती है। इसके माध्यम से हम अपने समाज के सदस्यों के प्रति कृतज्ञता और सहानुभूति का अभाव कर सकते हैं, और एक सशक्त और संवेदनशील समाज की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।



 सामाजिक सेवा: एक निःस्वार्थिक कर्तव्य

समाज सेवा एक निःस्वार्थिक कर्तव्य है जो हमें समाज में अपना योगदान देने के लिए प्रेरित करता है। यह हमें अपने आस-पास के लोगों की मदद करने और समाज को बेहतर बनाने के लिए सक्रिय रहने के लिए प्रेरित करता है। समाज सेवा करने से हम अपनी भूमिका में जागरूक होते हैं, अपने अंदर की अदम्यता को पहचानते हैं, और दूसरों के साथ अच्छे संबंध बनाते हैं।


समाज सेवा करने के कई तरीके हैं, जैसे वृद्धाश्रमों में सेवा, शिक्षा संस्थानों में शिक्षक के रूप में सेवा, गरीबों के लिए आहार वितरण, और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की सहायता। इन सभी कार्यों के माध्यम से हम अपने समाज के विकास में योगदान करते हैं और उसे समृद्ध बनाने में सहायता प्रदान करते हैं।


समाज सेवा का महत्व है क्योंकि यह हमें अपने समाज के साथियों की आवश्यकताओं को समझने और उन्हें समाधान करने में मदद करता है। इससे हम अपने जीवन को अर्थपूर्ण बनाते हैं और समाज में उत्थान और समृद्धि को प्रोत्साहित करते हैं।


अतः, हमें समाज सेवा में योगदान करने के लिए प्रेरित होना चाहिए। यह हमें समृद्ध और समान समाज की दिशा में एक प्रभावी कदम बढ़ाने में सक्षम बनाता है।


 

समाज सेवा: समृद्धि का माध्यम

समाज सेवा एक महत्वपूर्ण धार्मिक, नैतिक, और सामाजिक अभिवृद्धि का माध्यम है। यह एक संघर्ष है जो हर व्यक्ति और समुदाय को समृद्धि और समानता की दिशा में ले जाता है। समाज सेवा के माध्यम से, हम समाज में सामाजिक समस्याओं का समाधान करते हैं, गरीब, असहाय, और अन्य आवश्यकताओं के लिए सहायता प्रदान करते हैं, और एक स्वस्थ, सशक्त, और विकसित समाज की दिशा में कदम बढ़ाते हैं।

समाज सेवा के उद्देश्यों में विभिन्न क्षेत्रों का समावेश है, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, सांस्कृतिक विकास, और अन्य। यह विभिन्न प्रकार की सेवाओं, जैसे शिक्षा का प्रदान करना, बच्चों और महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाएं, वृक्षारोपण, और कूड़ा साफ़ करने जैसे कार्यों को सम्मिलित करता है।

समाज सेवा का महत्व इसलिए है क्योंकि यह समाज में एकता, समरसता, और भाईचारे को बढ़ाता है। यह सभी को मिलकर काम करने और एक-दूसरे की मदद करने की भावना को बढ़ाता है। समाज सेवा करने वाले व्यक्ति और संगठनों का सम्मान किया जाता है, और उन्हें समाज का सशक्त अंग माना जाता है।

अतः, हमें समाज सेवा में योगदान करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। यह हमें समृद्ध समाज की दिशा में प्रगति करने में मदद करेगा और हमारे समाज के सभी सदस्यों के लिए एक बेहतर भविष्य की ओर एक प्रभावी कदम होगा।


 समाज में सेवा का आदान-प्रदान करना एक महत्वपूर्ण और उत्तम तरीका है ताकि हम अपने समाज को मजबूत और समृद्ध बना सकें। सामाजिक सेवा में योगदान देने से हम समाज के असहाय वर्गों की मदद कर सकते हैं, गरीबों को सामूहिक रूप से उनकी जरूरतों का समर्थन प्रदान कर सकते हैं, और सामाजिक समस्याओं का समाधान करने में मदद कर सकते हैं।


सामाजिक सेवा में योगदान करने के लिए हमें समाज में उन लोगों के बारे में सोचना चाहिए जो सबसे अधिक आवश्यकता के बजाय हमें अधिकतम सहारा की जरूरत हैं। हम स्वयं को समर्पित करके उन्हें जीवन की एक बेहतर और उत्थान दायित्व को समझा सकते हैं। सामाजिक सेवा के माध्यम से हम अपनी अद्भुत सामाजिक जिम्मेदारियों को पूरा कर सकते हैं और समृद्ध समाज की ओर प्रगति कर सकते हैं।


इसलिए, हमें सामाजिक सेवा में योगदान करने के लिए प्रेरित करने के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो हमें समाज में सामाजिक समर्थन और समाधान प्रदान करने में सक्षम बनाता है।


समाज सेवा: अपने आस-पास की समृद्धि का एक उत्तम उपाय

समाज सेवा का महत्व और आवश्यकता हमारे समाज में निश्चित रूप से विशेष है। एक समृद्ध और सशक्त समाज की निर्माण में समाज सेवा का महत्वपूर्ण योगदान होता है। व्यक्ति या समूह के आत्मर्पण से ही समाज में सामाजिक समृद्धि और सम्प्रेषण संभव होता है।


समाज सेवा का मतलब अपने समाज में साझा की जाने वाली सेवा है, जो किसी भी प्रकार की समस्या का समाधान करती है। यह एक यातायात के समाधान, गरीबों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, और आर्थिक सहायता जैसे कई क्षेत्रों में काम करती है। समाज सेवा का उद्देश्य समाज में समृद्धि और समानता को प्रोत्साहित करना है।


इसलिए, हमें समाज सेवा के महत्व को समझकर उसमें योगदान करना चाहिए। हम समाज की समृद्धि के लिए अपना संपूर्ण सहारा देने के लिए समर्पित होने चाहिए। समाज सेवा के माध्यम से हम अपने समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक हो सकते हैं और समृद्ध समाज की दिशा में प्रगति कर सकते हैं।







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