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कड़ी पत्ते के पौधे को घना कैसे करें? गार्डनिंग एक्सपर्ट से जानें कड़ी पत्ते सूखने पर क्या करना चाहिए

गार्डनिंग एक्सपर्ट राजेश सैनी ने कड़ी पत्ते के पौधे को हरा-भरा और घना रखने के लिए कुछ आसान बातें बताई हैं. आइए जानते हैं इनके बारे में-

कड़ी पत्ते के पौधे को घना कैसे करें? गार्डनिंग एक्सपर्ट से जानें कड़ी पत्ते सूखने पर क्या करना चाहिए



कड़ी पत्ता खाने का स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए लगभग हर घर में इस्तेमाल किया जाता है. दाल से लेकर सब्जी तक, कई चीजों में इसकी पत्तियां डाली जाती हैं. ये न केवल खाने का जायका बढ़ाने का काम करता है, बल्कि इसे सेहत के लिए भी अच्छा माना जाता है. ऐसे में कई लोग घर पर ही कड़ी पत्ते का पौधा लगा लेते हैं. अगर आप भी इन्हीं लोगों में से एक हैं लेकिन आपका पौधा बढ़ नहीं रहा है या पौधे की पत्तियां सूख रही हैं, तो उसकी देखभाल के तरीके पर ध्यान देना जरूरी है. 

कड़ी पत्ते के पौधे को कितनी धूप दें?

तरुण चोपड़ा कहते हैं, अगर आप चाहते हैं कि आपका हरा-भरा रहे पौधा और इसकी पत्तियां सूखे नहीं, तो इसके लिए पौधे को सही धूप देना बहुत जरूरी है. एक्सपर्ट के मुताबिक, कड़ी पत्ते के पौधे के लिए करीब 15 से 35 डिग्री तापमान अच्छा माना गया है. बहुत ज्यादा ठंड में पौधे की बढ़त धीमी हो सकती है. वहीं, 35 डिग्री से ज्यादा गर्मी में तेज धूप से पत्तियां जल सकती हैं. इसलिए बहुत ठंड या तेज गर्मी से पौधे को बचाकर रखें. पौधे को ऐसी जगह रखें जहां सुबह या शाम की करीब 2 से 3 घंटे धूप मिले. दोपहर की तेज धूप से इसे बचाना बेहतर है.

मिट्टी में पानी जमा न होने दें

गार्डनिंग एक्सपर्ट कहते हैं, कड़ी पत्ते के पौधे को मिट्टी में नमी चाहिए, लेकिन गमले में पानी जमा नहीं होना चाहिए. आप मिट्टी में कोकोपीट और वर्मी कंपोस्ट मिला सकते हैं. इससे पौधे में नमी बनी रहेगी. इससे अलग गमले के नीचे पानी निकलने के लिए छेद जरूर होना चाहिए. खासकर बारिश के मौसम में ध्यान रखें कि पानी गमले में रुका न रहे. ज्यादा पानी से पौधे की जड़ें खराब हो सकती हैं.

पौधे को घना कैसे बनाएं?

कड़ी पत्ते के पौधे को घना बनाने के लिए एक्सपर्ट समय-समय पर इसकी ऊपर वाली टिप को काटने यानी ट्रिमिंग करने की सलाह देते हैं. जब ऊपर की टिप काटी जाती है तो वहां से नई टहनियां निकलने लगती हैं. इससे पौधा सिर्फ ऊपर की तरफ बढ़ने के बजाय चारों तरफ फैलने लगता है. ऐसे में पौधे को घना बनाने के लिए एक्सपर्ट हर थोड़े समय में ट्रिमिंग करने को जरूरी बताते हैं.

कड़ी पत्ते के पौधे में खाद कब और कैसे दें?

एक्सपर्ट के अनुसार कड़ी पत्ते का पौधा 12 महीने खिला रहता है. आप इसमें फरवरी के बाद से नवंबर तक करीब दो महीने के अंतर पर खाद दे सकते हैं. इसके साथ ही पौधे की मिट्टी में एंटी-फंगल पाउडर भी डाला जा सकता है. नवंबर से फरवरी तक पौधे में खाद न डालें.





करी पत्ते के पौधे में खट्टी छाछ क्यों डालते हैं

कई बार हम बची हुई या हल्की खट्टी हो चुकी छाछ को फेंक देते हैं, लेकिन यही छाछ पौधों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होती है। समय के साथ खट्टी हुई छाछ में प्राकृतिक बैक्टीरिया विकसित हो जाते हैं, जो मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने का काम करते हैं।

अगर घर में पहले से खट्टी छाछ मौजूद नहीं है, तो ताजी छाछ को 2–3 दिन सामान्य तापमान पर ढककर रखें। धीरे-धीरे उसमें खटास आ जाएगी। ध्यान रखें कि गाढ़ी छाछ सीधे पौधे में नहीं डालनी चाहिए, क्योंकि इससे मिट्टी में फंगस लगने का खतरा बढ़ जाता है।

छाछ को हमेशा पानी मिलाकर पतला करें और फिर महीने में एक बार पौधे की जड़ों के आसपास डालें। इससे मिट्टी में मौजूद अच्छे सूक्ष्म जीव सक्रिय हो जाते हैं। परिणामस्वरूप जड़ों को ज्यादा ऑक्सीजन और पोषण मिलता है। कुछ ही समय में पत्तियों का रंग गहरा हरा होने लगता है और पौधा ज्यादा फ्रेश दिखाई देता है।

करी पत्ते के पौधे में दही का घोल क्यों डालते हैं

दही सिर्फ खाने के लिए ही नहीं, बल्कि पौधों की ग्रोथ के लिए भी बेहद असरदार है। इसके लिए 3 से 4 चम्मच हल्की खट्टी दही लें और उसे अच्छी तरह फेंट लें। अब इसे एक मग पानी में मिलाकर घोल तैयार करें और रातभर ढककर रख दें।

अगले दिन दोपहर के समय पौधे की मिट्टी की हल्की गुड़ाई करें ताकि मिट्टी सख्त न रहे। इसके बाद तैयार दही का घोल जड़ों में डालें। ढीली मिट्टी पोषक तत्वों को आसानी से अंदर पहुंचने देती है, जिससे जड़ें मजबूत बनती हैं।



नियमित रूप से महीने में एक बार यह प्रक्रिया अपनाने पर पौधे में नई शाखाएं तेजी से निकलती हैं। धीरे-धीरे पौधा घना होने लगता है और पत्तियां चमकदार व स्वस्थ दिखती हैं।

करी पत्ते के पौधे में की देखरेख की कुछ जरूरी सावधानियां

करी पत्ते के पौधे में इन घरेलू उपायों का इस्तेमाल करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। हमेशा पतला घोल ही डालें और ज्यादा मात्रा से बचें। बरसात या बहुत ज्यादा नमी वाले मौसम में प्रयोग कम करें। साथ ही पौधे को रोजाना हल्की धूप जरूर मिले, क्योंकि बिना धूप के कोई भी पोषण पूरा असर नहीं दिखा पाता।

अगर आप चाहते हैं कि आपका करी पत्ता जल्दी बड़ा, हरा-भरा और घना बने, तो महंगी खाद छोड़कर इन आसान घरेलू उपायों को जरूर अपनाएं। थोड़ी सी देखभाल और रसोई की ये सफेद चीजें आपके पौधे की ग्रोथ को सच में 'रॉकेट स्पीड' दे सकती हैं।



कड़ी पत्ते के पौधे को कीड़ों से कैसे बचाएं?

कई बार पौधे में कीड़ा लगने से भी इसकी ग्रोथ नहीं होती है या पत्तियां सूखकर झड़ने लगती है. अगर आपके पौधे की पत्तियां भी सूख रही हैं, तो ध्यान दें कि कहीं पौधे में कीड़े तो नहीं लगे हैं. वहीं, क्योंकि कड़ी पत्ता खाने में इस्तेमाल किया जाता है, ऐसे में कीड़ों को खत्म करने के लिए इस पौधे पर किसी भी तरह के केमिकल का इस्तेमाल न करें. इससे अलग आप नीम के तेल को पानी में मिलाकर पत्तियों पर छिड़काव कर सकते हैं. एक्सपर्ट बताते हैं नीम पौधे पर मौजूद कीड़ों को खत्म करने में मदद करता है.

इस तरह आप छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देकर अपने कड़ी पत्ते के पौधे को हरा-भरा और घना बना सकते हैं.

अब घर बैठे ऐप से बुक होगा यूरिया-DAP, जानें जरूरी डिटेल, खाद के लिए नहीं लगानी पड़ेगी लाइन, 

भारत सरकार द्वारा एक नया मोबाइल ऐप FFS (Framework for Fertilizer Sale)  किया गया है, जिसके जरिए किसान घर बैठे ही यूरिया और DAP जैसी जरूरी खाद की बुकिंग कर सकते हैं.

अब घर बैठे ऐप से बुक होगा यूरिया-DAP, जानें जरूरी डिटेल, खाद के लिए नहीं लगानी पड़ेगी लाइन,
खेती-किसानी करने वाले किसानों के लिए एक बड़ी और काम की खबर सामने आई है. अब खाद खरीदने के लिए लंबी लाइन में लगने या एक दुकान से दूसरी दुकान तक चक्कर लगाने की परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है. भारत सरकार द्वारा एक नया मोबाइल ऐप विकसित किया गया है, जिसके जरिए किसान घर बैठे ही यूरिया और DAP जैसी जरूरी खाद की बुकिंग कर सकते हैं. फिलहाल इस नई व्यवस्था की शुरुआत उत्तर प्रदेश के रामपुर और सीतापुर जिलों से पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर की जा रही है. इस डिजिटल सिस्टम का नाम FFS (Framework for Fertilizer Sale) रखा गया है, जिसका मकसद खाद वितरण को आसान और पारदर्शी बनाना है.

क्या है FFS App?

FFS एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे किसानों को खाद से जुड़ी जानकारी और बुकिंग की सुविधा देने के लिए तैयार किया गया है. इस ऐप की मदद से किसान अपने आसपास के खाद विक्रेताओं के पास उपलब्ध स्टॉक की जानकारी देख सकेंगे. इसके साथ ही जरूरत के अनुसार खाद को पहले से बुक भी कर सकेंगे. इससे खाद की तलाश में बार-बार बाजार जाने की जरूरत कम होगी.

किसान कैसे कर सकेंगे लॉगिन?

सरकार की योजना के मुताबिक किसान अपनी फार्मर आईडी या आधार नंबर के जरिए ऐप में लॉगिन कर सकेंगे. लॉगिन के बाद वो अपने नजदीकी खाद विक्रेता का चयन कर पाएंगे और अपनी जरूरत के अनुसार खाद रिजर्व कर सकेंगे.

बुकिंग के बाद क्या मिलेगा?

जब किसान ऐप के जरिए खाद बुक करेंगे, तब उन्हें एक बुकिंग आईडी और एक QR कोड मिलेगा. इसके बाद किसान संबंधित दुकान पर जाकर ये QR कोड या बुकिंग आईडी दिखाकर अपनी बुक की गई खाद पा सकेंगे.

किसानों को क्या होगा फायदा?

इस व्यवस्था से किसानों का समय बचेगा और खाद बुकिंग पहले से आसान होगी. स्टॉक की सही जानकारी मोबाइल पर मिल सकेगी. भीड़ और अव्यवस्था कम हो सकती है. साथ ही खरीद-बिक्री का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी.

अभी किसानों को क्या करना चाहिए?

किसानों को अपनी फार्मर आईडी तैयार रखनी चाहिए. आधार से जुड़ी जानकारी अपडेट रखनी चाहिए और मोबाइल नंबर चालू रखना चाहिए. साथ ही सरकार की ओर से जारी होने वाली नई सूचनाओं पर नजर बनाए रखनी चाहिए.

किसानों का नया व्यापार बना "मधुमक्खी पालन", एक ही खेत से मिलेगा डबल मुनाफा! सरकार दे रही है लाखों की मदद

भीलवाड़ा के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ मधुमक्खी पालन अपनाकर अपनी आय दोगुनी कर रहे हैं. उद्यान विभाग की योजना के तहत 2 लाख की यूनिट पर 40% अनुदान मिल रहा है. किसानों ने 50-50 बॉक्स लगाकर शहद उत्पादन शुरू किया है, जो 600 से 900 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है. मधुमक्खियों के कारण परागण बेहतर होने से फसलों की पैदावार भी बढ़ी है. अब किसान अपने शहद को ऑनलाइन बेचने की योजना बना रहे हैं, जिससे यह व्यवसाय युवाओं के लिए स्वरोजगार का बड़ा जरिया बन गया है.

किसानों का नया व्यापार बना "मधुमक्खी पालन", एक ही खेत से मिलेगा डबल मुनाफा! सरकार दे रही है लाखों की मदद

भीलवाड़ा. राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में अब किसान पारंपरिक खेती के सीमित दायरे से बाहर निकलकर अतिरिक्त आय के नए रास्ते तलाश रहे हैं. इस दिशा में मधुमक्खी पालन (Beekeeping) एक तेजी से उभरता और लोकप्रिय विकल्प साबित हो रहा है. उद्यान विभाग की राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत युवाओं को मिल रहे प्रशिक्षण और भारी अनुदान ने इस व्यवसाय को नई ऊंचाई दी है. जिले के कई प्रगतिशील किसानों ने हाल ही में 50-50 बॉक्स की यूनिट स्थापित कर न केवल शहद उत्पादन में सफलता हासिल की है, बल्कि अपनी मासिक आय में भी जबरदस्त वृद्धि दर्ज की है.

मधुमक्खी पालन व्यवसाय की सबसे बड़ी खूबी इसकी कम लागत और अधिक मुनाफा है. करीब 2 लाख रुपए की शुरुआती लागत से तैयार होने वाली एक यूनिट पर सरकार 40 प्रतिशत तक का अनुदान दे रही है. इससे किसानों पर शुरुआती निवेश का आर्थिक बोझ काफी कम हो जाता है. उपनिदेशक उद्यान शंकर सिंह ने बताया कि इस योजना के तहत 50 बॉक्स और 50 कॉलोनी के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है. इस व्यवसाय के लिए खेत या बगीचा होना अनिवार्य है, क्योंकि मधुमक्खियां फसलों और पेड़ों पर खिलने वाले फूलों से मकरंद (Nechter) एकत्र कर शहद बनाती हैं.

फसल के साथ शहद का ‘डबल धमाका’

भीलवाड़ा के मांडल निवासी आशुतोष व्यास इस बदलाव के बड़े उदाहरण हैं. उन्होंने विभाग से प्रशिक्षण लेने के बाद अपने खेत पर 50 बॉक्स के साथ यूनिट शुरू की. दिसंबर और जनवरी के दौरान सरसों की फसल के फूलों से उन्हें हर महीने प्रति बॉक्स 30 किलो से अधिक शहद प्राप्त हुआ. वर्तमान में उनका शहद घर बैठे 600 रुपए प्रति किलो की दर से बिक रहा है. खास बात यह है कि जब फूलों का सीजन नहीं होता, तब मधुमक्खियों को जीवित रखने के लिए शक्कर के घोल का भोजन दिया जाता है. मधुमक्खियां खुद-ब-खुद फूलों से मधु लाने और उसे छत्ते में सुखाने का काम करती हैं, इंसान को केवल शहद एकत्र करना होता है.

बगीचों में मुनाफे की मिठास

कालसांस के पास नींबू और अमरूद का बगीचा चलाने वाले चेनसिंह राठौड़ ने भी अपने बाग में 50 बॉक्स रखवाए हैं. वे बताते हैं कि नींबू और अमरूद के उत्पादन के साथ-साथ अब उन्हें शहद से भी अतिरिक्त कमाई हो रही है. उनका शहद ‘मयूर ब्रांड’ के नाम से 800 से 900 रुपए प्रति किलो की दर से बिक रहा है. अब वे अपने उत्पाद को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए बड़े बाजार में बेचने की तैयारी कर रहे हैं. मधुमक्खी पालन का एक बड़ा वैज्ञानिक लाभ यह भी है कि इससे परागण (Pollination) बेहतर होता है, जिससे मुख्य फसल की पैदावार भी 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ जाती है.

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