कौन है राम मंदिर के नए CEO, जीतेंद्र मिश्रा जानें
कौन है राम मंदिर के नए CEO, जीतेंद्र मिश्रा जानें
राम मंदिर के ट्रस्ट के नए CEO के नाम का ऐलान हो गया है. रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को नया CEO चुना गया है.
कौन है राम मंदिर के नए CEO, जीतेंद्र मिश्रा जानें
वायुसेना से रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO होंगे. बुधवार को ट्रस्ट की बैठक में उन्हें CEO चुना गया. रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा हाल ही में वायुसेना से रिटायर्ड हुए हैं. पाकिस्तान के खिलाफ 'ऑपरेशन सफेद सागर' और 'ऑपरेशन सिंदूर' में उनकी अहम भूमिका रही है.
1999 में कारगिल युद्ध के समय 'ऑपरेशन सफेद सागर' के दौरान उन्होंने मिराज 2000 से पाकिस्तानी सेना पर बमबारी की थी. वहीं, पिछले साल पहलगाम अटैक के बाद हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' की कमान इन्हीं के हाथों में थी.
'ऑपरेशन सिंदूर' में उनकी अहम भूमिका के लिए उन्हें पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था. इससे पहले 2024 में उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल और 2013 में विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था.
जीतेंद्र मिश्रा 6 दिसंबर 1986 को एयर फोर्स एकेडमी से वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में शामिल किया गया था. लगभग 40 साल के करियर में उन्होंने 3 हजार घंटे से ज्यादा उड़ान भरने का अनुभव है. उन्होंने 18 से ज्यादा तरह के लड़ाकू विमान, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर उड़ाए हैं.
स्क्वाड्रन लीडर के तौर पर, वह उस टीम का हिस्सा थे जिसने कारगिल युद्ध की शुरुआत में मिराज 2000 एयरक्राफ्ट पर लेजर-गाइडेड बमों को ऑपरेशनल बनाया था. इन बमों का इस्तेमाल बाद में 'ऑपरेशन सफ़ेद सागर' के दौरान टाइगर हिल और मुंथो ढालो पर हुए हमलों में किया गया था.
वायुसेना में रहते हुए उन्होंने एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट में चीफ टेस्ट पायलट और एयर हेडक्वार्टर में ऑपरेशन प्लानिंग एंड असेसमेंट ग्रुप के डायरेक्टर के तौर पर काम किया है.
'ऑपरेशन सिंदूर' में क्या था रोल?
एयर मार्शल की रैंक पर प्रमोट होने के बाद 9 जनवरी 2023 को उन्हें डिप्टी चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में नियुक्त किया गया था. इसके बाद उन्हें 5 दिसंबर 2023 को इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन) में डिप्टी चीफ नियुक्त किया गया.
1 जनवरी 2025 को उन्हें वायुसेना की वेस्टर्न कमांड का कमांडिंग इन चीफ बनाया गया. वायुसेना की इसी कमांड पर पाकिस्तान से लगने वाली सरहद की सुरक्षा की कमान है. पिछले साल पहलगाम अटैक के बाद जब 6-7 मई की रात को भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन सिंदूर' लॉन्च किया था, तब इसकी कमान रिटायर्ड एयर मिश्रा जीतेंद्र मिश्रा के पास ही थी.
हाल ही में न्यूज एजेंसी ANI को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान S-400 सिस्टम का पता लगाने के लिए पाकिस्तान बेताब था और इसके लिए उसने जासूसों और स्लीपर सेल को एक्टिवेट कर दिया था.
उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान यह पता लगाने के लिए बेताब था कि ये S-400 कहां हैं? उन्होंने हर मुमकिन तरीका अपनाया. उन्हें दूसरे देशों से सैटेलाइट से भी मदद मिल रही थी. जब भी वे (पाकिस्तान) हवा में आते, उन्हें S-400 से मार गिराया जाता. उनके लिए S-400 सबसे बड़ा खतरा था. उन्होंने S-400 की लोकेशन का पता लगाने के लिए भारत के अंदर भी जासूसों और स्लीपर सेल को एक्टिवेट किया था.'
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एयरबोर्न रडार सिस्टम के जरिए भारतीय ऑपरेशन का पता लगा सकता था. उन्होंने यह भी बताया कि S-400 ऑपरेटर ने आने वाले टारगेट पर हमला करने की इजाजत मांगी थी.
उन्होंने कहा, 'वे सिर्फ एयरबोर्न रडार के जरिए ही देख सकते थे. मेरे S-400 ऑपरेटर ने मुझसे पूछा कि क्या वह शूट कर सकता है. मैंने कहा, 'शूट करो.' और जब शूट किया तो हमने उसे 314 किलोमीटर की दूरी पर मार गिराया.'
UP के लाखों आउटसोर्स कर्मचारियों की मौज, सैलरी बढ़ने के साथ मिली जॉब सिक्योरिटी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, लगभग 3.5 लाख से ज्यादा कर्मियों के हितों से जुड़ी हुए इस निगम के शुभारंभ पर मैं सभी को बधाई देता हूं. कर्मचारियों के हितों को लेकर उन्होंने कहा, कर्मचारियों को हमेशा ये पता होना चाहिए कि उनके अच्छे काम का रिकॉर्ड रखा जा रहा है, उसके अधिकारों को सुरक्षित रखा जा रहा है, उसकी समस्या को सुनने का एक तंत्र है और वो अकेला नहीं है. कर्मचारी को उसका वेतन समय से मिले, उसकी भविष्य निधि और बीमा से जुड़े अधिकार सुरक्षित रहें. हर आउटसोर्स कर्मी को उसकी मेहनत के हिसाब से सैलरी मिले.
इस कार्यक्रम के दौरान यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, अगर कोई बेटा या बेटी यूपी में आउट सोर्सिंग के जरिए काम करना चाहता है तो उससे अगर कोई वसूली की जाएगी तो आपकी आउट सोर्सिंग कंपनी तो ब्लैकलिस्ट हो ही जाएगी, लेकिन आपको भी जेल की हवा खानी पड़ेगी. डिप्टी सीएम ने कहा कि अगर कोई सरकारी कर्मचारी गलती करता है तो उसे सीधे नौकरी से नहीं निकाला जाता है, उसकी एक प्रक्रिया होती है. अगर उस पर लगे आरोप सिद्ध होते हैं तो उसे नौकरी से बर्खास्त किया जाता है. इसी तरह अब आउट सोर्सिंग वालों के लिए स्थिति हो गई, यानी उन्हें सीधे नहीं निकाला जा सकता है. अगर कोई आरोप लगेगा तो उसकी जांच होगी और इसके बाद ही फैसला लिया जाएगा.
आउटसोर्स कर्मियों के लिए क्या बदला?
राम मंदिर के CEO का ऐलान, रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को मिली जिम्मेदारी
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायु सेना के एक रिटायर्ड अधिकारी हैं, उन्होंने वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के तौर पर काम किया. इससे पहले, उन्होंने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन्स) के डिप्टी चीफ के तौर पर काम किया था. वे इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइज़ेशन और ट्रेनिंग के डिप्टी चीफ भी रह चुके हैं.
मिश्रा नेशनल डिफेंस एकेडमी, खड़कवासला और एयर फोर्स एकेडमी, डुंडीगल के पूर्व छात्र हैं. वे एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल, एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, मोंटगोमरी, अलबामा और रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज के भी पूर्व छात्र हैं.
मिश्रा को 6 दिसंबर 1986 को एयर फोर्स एकेडमी से भारतीय वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था. 38 साल से ज्यादा के करियर में, उन्हें 3000 घंटे से ज्यादा का फ्लाइट एक्सपीरियंस है. उन्होंने 18 से ज्यादा तरह के फाइटर, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर उड़ाए हैं.
स्क्वाड्रन लीडर के तौर पर, वे उस टीम का हिस्सा थे जिसने कारगिल युद्ध की शुरुआत में मिराज 2000 एयरक्राफ्ट पर लेजर-गाइडेड बमों को ऑपरेशनल बनाया था. इन बमों का इस्तेमाल बाद में ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान टाइगर हिल और मुंथो ढालो पर हुए मशहूर हमलों में किया गया था.
5500 से ज्यादा आवेदन आए राम मंदिर के पहले CEO पद के लिए कुल 5585 आवेदन आए. ट्रस्ट ने इनमें से तीन उम्मीदवार चुने उसमें से जितेंद्र मिश्रा को यह जिम्मेदारी मिली है. इसके लिए बुधवार को ट्रस्ट की बैठक हुई. बैठक में ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, स्वामी कमलनयन दास, अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन, ट्रस्टी महंत दीनेंद्र दास और कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि सहित अन्य लोग मौजूद रहे.
सीईओ के चयन की प्रक्रिया में AI आधारित स्क्रीनिंग के साथ मैनुअल मूल्यांकन का इस्तेमाल किया गया. आवेदनों की जांच के लिए 600 अंकों का मूल्यांकन ढांचा तैयार किया गया था. प्रारंभिक मूल्यांकन में 3,577 उम्मीदवार शामिल हुए, जिनमें से 470 या उससे अधिक अंक पाने वाले उम्मीदवारों को चयनित किया गया. इसके बाद 11 और 12 अगस्त को अयोध्या में 108 आवेदकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बातचीत की गई और अंतिम रूप से 16 उम्मीदवारों का इंटरव्यू किया गया.
राम मंदिर CEO का ऐलान ऐसे समय में हुआ है, जब मंदिर को मिले चंदा में कथित चोरी का विवाद चल रहा है. इस मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी हुई है और ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और एक अन्य पदाधिकारी ने इस्तीफा दे दिया है.
🌞सुप्रभातम🌞
दिनांक:- 02/09/2026, बुधवार
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चाय की चुस्की, और बच गयी जान, 10 मिनट की दुरी पर खड़ा था काल, नेपाल से लौटे रायपुर के दोस्तों की कहानी
दरअसल, रायपुर के माणा कैंप क्षेत्र के रहने वाले नारायण सेन, दिनेश ओझा, प्रेम सिंह जगत, यतेंद्र प्रकाश और दिनेश सिंह ठाकुर शनिवार को अपने घर वापस लौटे. इन लोगों ने बताया कि वह भी नेपाल की बाढ़ की चपेट में आने से बाल-बाल बचे हैं. क्योंकि वह एक जगह पर चाय पीने के लिए रुक गए थे, जहां उन्हें 10 मिनट का समय लग गया. इसी दौरान भोटे कोशी और त्रिशूली नदी घाटियों में भीषण बाढ़ आई थी. जिससे पूरा इलाका तबाह हो गया. नारायण सेन ने बताया कि इस बाढ़ से हम सभी लोग बच गए और सुरक्षित अपने घर लौट आए.
दरअसल, रायपुर से गए यह सभी लोग 26 अगस्त को धड़िंग जिले में थे. यहां के मलेखू कस्बे के एक होटल में चाय पीने के लिए रुक गए थे. उस वक्त सुबह 9 बजकर 30 मिनट का समय था. सभी को चाय की तलब लगी थी, जिससे सबने होटल देखकर आगे बढ़ने से पहले चाय पीने का फैसला किया. इसी दौरान अचानक से भीषण बाढ़ आई थी. अगर हम 10-15 मिनट पहले निकल गए होते तो शायद फंस गए होते. यात्रियों ने बताया कि वह पशुपतिनाथ मंदिर तक जाने वाले थे. इसके अलावा उनकी नेपाल के अन्य पर्यटन स्थलों पर घूमने की योजना थी. लेकिन बाढ़ के बाद सबकुछ बदल गया.
नारायण सेन ने बताया कि कुछ देर बाद हमें पता चला कि आगे एक पुल बाढ़ में बह गया है, इसके बाद ये दोस्त सामने आ रही भयावह आपदा के प्रत्यक्षदर्शी बन गए. सेन ने कहा हमने देखा कि कारें त्रिशूली नदी में बह रही थीं. पानी के तेज बहाव में शव और कई अन्य चीजें भी बहकर जा रही थीं. हम डर गए थे, हर समय यह आशंका बनी हुई थी कि बाढ़ की स्थिति और खराब हो सकती है. जहां हम थे, वह होटल एक भारतीय व्यक्ति का था, जिसने हमारी काफी मदद की और हमें भोजन भी उपलब्ध कराया. बाद में हम सभी ने मलेखू में एक ऊंची जगह पर शरण ली और रात अपनी कार में बिताई.
पुलिस में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात दिनेश ठाकुर ने बताया कि जब बाढ़ आई, तब वे पशुपतिनाथ मंदिर से करीब 50 किलोमीटर दूर थे. होटल में चाय पीते समय हमने देखा कि अचानक लोग बेचैन होने लगे. बाद में हमें बाढ़ से हुई तबाही के बारे में पता चला. हमने सुना कि पूरे गांव, इमारतें, कार्यालय और जलविद्युत परियोजनाएं तबाह हो गई हैं. हम लगातार भगवान शिव का नाम जपते रहे और हमें लगता है कि उनकी कृपा ने हमारी रक्षा की है. स्थानीय लोगों ने भी हमारी मदद की थी. जिसके लिए वह उनके शुक्रगुजार हैं.
रायपुर के दोस्तों का यह समूह का यह समूह 25 अगस्त को नेपाल से रवाना हुआ और 27 अगस्त तक रायपुर लौट आया. इस दौरान उन्होंने एक भावुक पल के बारे में भी बताया. दिनेश ठाकुर ने बताया हम रक्षाबंधन के बाद यात्रा से लौटने वाले थे इसलिए हमारी बहनों ने हमें पहले ही राखी दे दी थी. वहां तैनात महिला सुरक्षा कर्मियों ने हमारी कलाई पर ये राखियां बांधी. वह हमारे लिए सबसे सुकून भरा पल था. हम जो कुछ देख चुके हैं, उसे कभी नहीं भुला पाएंगे. कई लोग अपने लापता परिजनों की तलाश में बुरी तरह परेशान होकर इधर-उधर भटक रहे थे. वह बहुत हैरान करने वाला पल था.