यहॉ जो रुक गया, शायद ही वो कभी वापस आया- मुरैना का वो तिलिस्म
यहॉ जो रुक गया शायद ही वो कभी वापस आया- मुरैना का वो तिलिस्म
मुरैना का ये मंदिर कभी था 'तांत्रिक यूनिवर्सिटी', गर्भ गृह में हैं एक साथ 2 शिवलिंग; इसके डिजाइन पर बनी है भारत की पुरानी संसद
यहॉ जो रुक गया शायद ही वो कभी वापस आया- मुरैना का वो तिलिस्म
मुरैना का ये मंदिर कभी था 'तांत्रिक यूनिवर्सिटी', गर्भ गृह में हैं एक साथ 2 शिवलिंग; इसके डिजाइन पर बनी है भारत की पुरानी संसद
इस मंदिर से जुड़े कुछ ऐसे रहस्यमयी पहलू हैं, जो आज भी वैज्ञानिकों और इतिहासकारों के लिए एक बड़ी पहेली बने हुए हैं. आइए जानते हैं इस अद्भुत मंदिर की वो अनकही दास्तान, जो आपको हैरत में डाल देगी.
इस रहस्यमयी सफर की शुरुआत मितावली गांव की एक शांत पहाड़ी से होती है. पहाड़ी की ऊंचाई करीब 100 फीट है, जहां तक पहुंचने के लिए पत्थरों को काटकर बनाई गई 108 कठिन सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं.
लेकिन चढ़ाई शुरू करने से पहले ही मुख्य द्वार पर करीब 5 फीट ऊंची नंदी महाराज की भव्य प्रतिमा आपका रास्ता रोक लेती है. आर्किटेक्चर का अद्भुत नमूना देखिए यह विशाल मूर्ति किसी जोड़-तोड़ से नहीं, बल्कि एक ही सिंगल पत्थर को तराश कर बनाई गई है. मानो शिव का यह वाहन सदियों से मंदिर की रखवाली कर रहा हो.
सीढ़ियों का इम्तिहान पास कर जैसे ही आप ऊपर पहुंचेंगे, आंखों के सामने एक अद्भुत, गोल पहिये जैसा ढांचा दिखाई देगा. यह आम मंदिरों की तरह शिखर वाला नहीं है, बल्कि पूरी तरह से खुले आसमान के नीचे बना हुआ है.
मंदिर के चारों तरफ एक गोलाकार गलियारा है, जिसमें 64 छोटे-छोटे कमरे बने हैं. कच्छपघात राजवंश के राजा देवपाल द्वारा सन 1323 में बनवाए गए इस मंदिर के हर कमरे में कभी योगिनी (अलौकिक शक्तियों वाली देवियों) की मूर्तियां हुआ करती थीं. लेकिन आज स्थिति अलग है.
आज इन 64 कमरों में देवियों की जगह सिर्फ शिवलिंग स्थापित हैं. इतिहासकारों का मानना है कि चंबल के डाकुओं और अंतरराष्ट्रीय मूर्ति तस्करों की काली नजरों से बचाने के लिए सरकार ने मूल मूर्तियों को यहां से हटाकर सुरक्षित संग्रहालयों (म्यूजियम) में रखवा दिया था.

एक साथ दो शिवलिंगों का रहस्य
इस गोलाकार मंदिर के ठीक केंद्र (सेंटर) में मुख्य गर्भ गृह स्थित है. आमतौर पर किसी भी शिव मंदिर में एक गर्भ गृह के भीतर एक ही शिवलिंग होता है. लेकिन मितावली के इस मंदिर में एक बड़ा और एक छोटा शिवलिंग एक साथ स्थापित हैं.
तंत्र शास्त्र के जानकारों के अनुसार, यह कोई साधारण पूजा स्थल नहीं था. मुख्य गर्भ गृह ब्रह्मांडीय ऊर्जा को आकर्षित करने का केंद्र था. यहां दो शिवलिंगों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि प्राचीन समय में यहां विशेष तांत्रिक अनुष्ठान और गुप्त सिद्धियां की जाती थीं, जहां मुख्य यजमान के लिए विशेष अभिषेक की व्यवस्था होती थी.
वहीं, प्रसिद्ध इतिहासकारों और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के शोधकर्ताओं का मानना है कि यह मंदिर केवल तंत्र साधना का केंद्र नहीं था, बल्कि यह खगोल विज्ञान (Astronomy) की एक उन्नत प्रयोगशाला भी था.
मंदिर की छत न होने का सबसे बड़ा कारण यह था कि प्राचीन साधक रात के समय तारों, नक्षत्रों और ग्रहों की चाल को सीधे देख सकें. माना जाता है कि 64 की संख्या केवल देवियों की नहीं, बल्कि साल के खास नक्षत्रों और चक्रों को दर्शाती है. सूर्य की देशांतर रेखाओं को ध्यान में रखकर ही इसके गोलाकार कमरों का निर्माण किया गया था.

इसी मंदिर की नकल है हमारा पुराना संसद भवन?
इस मंदिर का सबसे बड़ा और चर्चित विवाद इसके डिजाइन को लेकर है. यदि आप दिल्ली में स्थित भारत के पुराने संसद भवन की तस्वीर और इस मंदिर की तस्वीर को एक साथ देखेंगे, तो दोनों में कोई अंतर नजर नहीं आएगा.
दोनों का गोलाकार ढांचा, गलियारा और खंभों (Pillars) की कतार बिल्कुल एक जैसी है. हालांकि, ब्रिटिश आर्किटेक्ट एडविन लुटियंस की किसी भी डायरी या सरकारी दस्तावेज में इस बात का आधिकारिक प्रमाण नहीं है कि उन्होंने इस मंदिर की नकल की थी. लेकिन दोनों की अविश्वसनीय समानता को देखकर यह साफ हो जाता है कि लुटियंस इस प्राचीन भारतीय वास्तुकला से गहरे प्रभावित थे.

रात ढलते ही वीरान हो जाता है ये मंदिर?
स्थानीय लोगों और मंदिर के पुजारियों की मानें तो इस मंदिर में सूर्यास्त के बाद रुकना सख्त मना है. लोक मान्यताओं के अनुसार, आज भी अमावस्या की रात को दूर-दूर से अघोरी, तांत्रिक और यहां तक कि विदेशी सैलानी भी यहां गुप्त तांत्रिक क्रियाएं करने आते हैं.
मंदिर के संकरे गलियारे और छोटे दरवाजे इस तरह बनाए गए हैं कि कोई भी कितना भी शक्तिशाली इंसान क्यों न हो, उसे गर्भगृह में नतमस्तक होकर ही प्रवेश करना पड़ता है.
सरकार बिना गारंटी दे रही 300000 रुपये का लोन... 5 प्रतिशत का ब्याज, जानें कौन और कैसे ले सकता है लाभ
आर्थिक तंगी की वजह से अगर आप अपना कारोबार शुरू नहीं कर पा रहे हैं तो आपके लिए ऐसी स्कीम है, जिसमें सरकार आपको खुद मदद करेगी. अगर आप में हुनर है और आप उस हुनर को कारोबार में इस्तेमाल करना चाहते हैं तो केंद्र सरकार आपकी मदद करेगी. केंद्र सरकार ऐसे लोगों को बिना गारंटी 300000 (3 Lakh) रुपये की लोन देती है. इसके जरिए आप अपना रोजगार शुरू कर सकते हैं. इतना ही नहीं इस लोन पर सरकार ब्याज पर सब्सिडी भी देती है. जिससे आपको लोन को चुकाना भी आसान होता है.
केंद्र सरकार की इस योजना का नाम है पीएम विश्वकर्मा योजना, जिसे सरकार 3 साल से चला रही है. इसके तहत पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को लोन दिया जाता है इस योजना में 18 व्यवसायों को शामिल किया गया है. इससे ग्रामीण क्षेत्र और शहरी क्षेत्रों के कारीगरों और शिल्पकारों को मदद मिलती है.
बढ़ई, नाव निर्माता, अस्त्र निर्माता, लोहार, हथौड़ा और टूलकिट निर्माता, ताला बनाने वाला, सुनार, कुम्हार, मूर्तिकार और पत्थर तराशने वाला, पत्थर तोड़ने वाला, चमड़े का काम करने वाला, राजमिस्त्री, टोकरी, चटाई, झाड़ू बनाने वाला / कॉयर बुनकर, पारंपरिक गुड़िया और खिलौना निर्माता, नाई, माला बनाने वाला, धोबी, दर्जी और मछली पकड़ने का जाल बनाने वाला पीएम विश्वकर्मा योजना में शामिल हैं.
विश्वकर्मा योजना के तहत सरकार 3 लाख रुपये का लोन दो स्टेप में दिया जाता है. पहले चरण में कारोबार शुरू करने के लिए 1 लाख रुपये का लोन दिया जाता है. जिसे 18 महीने में चुकाने होते हैं. इसके बाद कारोबार के विस्तार के लिए 2 लाख रुपये का लोन दिया जाता है. जिसे चुकाने के लिए 30 महीने का समय दिया जाता है.
लोन के अलावा इसमें 18 ट्रेड में स्किल्ड लोगों को मास्टर ट्रेनरों के जरिए ट्रेनिंग भी दी जाती है. इसमें ट्रेनिंग के साथ 500 रुपये स्टाइपेंड भी दिया जाता है.
3 लाख रुपये के लोन पर विश्वकर्मा योजना में ब्याज पर सब्सिडी दी जाती है और इसके लिए महज 5 प्रतिशत ब्याज देना होता है. खास बात यह है कि लोन देने के लिए किसी तरह की गारंटी देने की जरूरत नहीं है.
लोन के लिए आवेदन करने के साथ कुछ जरूरी डॉक्यूमेंट देना जरूरी है. जरूरी दस्तावेजों में आधार कार्ड, पैन कार्ड, आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, पहचान पत्र, निवास प्रमाण पत्र, पासपोर्ट साइज फोटो, बैंक पासबुक की कॉपी और वैध मोबाइल नंबर देना होता है.
आवेदन करने के लिए 18 से 50 साल की उम्र होनी चाहिए. वहीं लोन के लिए आवेदन pmvishwakarma.gov.in वेबसाइट पर जाकर अप्लाई ऑप्शन पर क्लिक करें. यहां आपको रजिस्ट्रेशन करना होगा. रजिस्ट्रेशन करने के बाद रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड आपके मोबाइल नंबर पर SMS के जरिए भेजा जाएगा. इसके बाद आवेदन को अच्छी तरह से पढ़ कर पूरा भरें और दस्तावेज अटैच कर सबमिट कर दें.
41 दिन और 300 करोड़ पार,बिगड़ी बॉक्स ऑफिस की गणित -हनुमान अंश
हाँ जी हम बात कर रहे हैं हमारे आराध्य श्री नीम करोली बाबा पर बनी फिल्म हनुमान अंश की जो अब बॉक्स ऑफिस की किंग बन चुकी है
नीम करोली बाबा पर बनी फिल्म हनुमान अंश के 300 करोड़ की वर्ल्डवाइड कमाई पर पृथ्वीराज सुकुमारण ने कहा- "अगर किसी फिल्म का दायरा उसके बजट से तय होता तो आज हम 'हनुमान अंश' के बारे में बात नहीं कर रहे होते."नई दिल्ली: नीम करोली बाबा पर बनीं हनुमान अंश दुनियाभर में 300 करोड़ पार कमाई 41 दिनों में हासिल कर चुकी है. वहीं फिल्म को दर्शकों का खूब प्यार मिल रहा है. इसी बीच मेघना गुलजार की दायरा में नजर आने को तैयार एक्टर पृथ्वीराज सुकुमारन ने हनुमान अंश की तारीफ की है. उनसे जब पूछा गया कि अलग-अलग स्केल और बजट वाली फिल्मों में काम करते समय एक्टर्स शूटिंग की असलियतों के हिसाब से खुद को कैसे ढालते हैं, जिस पर उन्होंने कहा, "अब किसी फिल्म का दायरा उसके बजट से तय नहीं होता, बल्कि उसके कंटेंट से होता है. अगर बजट से दायरा तय होता, तो आज हम 'हनुमान अंश' के बारे में बात नहीं कर रहे होते."
हनुमान अंश की 41 दिनों में कमाई 300 करोड़ पार
दो करोड़ के बजट में बनीं हनुमान अंश के 41 दिनों के कलेक्शन की बात करें तो सैकनिल्क के अनुसार, 41वें दिन 9,203 शोज के साथ फिल्म ने 6 करोड़ का कलेक्शन हासिल किया है. वहीं इसके साथ भारत में नेट कलेक्शन 237.13 करोड़ पहुंचा है. जबकि ग्रॉस कलेक्शन 280 करोड़ जा पहुंची है. वहीं 41वें दिन 1.75 करोड़ ओवरसीज कमाई के साथ फिल्म ने वर्ल्डवाइड कमाई 300.25 करोड़ कर ली है, जिसमें 20.25 करोड़ ओवरसीज कलेक्शन है.
तरण आदर्श ने की हनुमान अंश की तारीफ
तरण आदर्श ने NDTV से बातचीत में कहा, "तीसरे वीकेंड से ही फिल्म अचानक बेहतर प्रदर्शन करने लगी. दर्शक ही इसके ब्रांड एंबेसडर बन गए. उन्होंने सोशल मीडिया, WhatsApp और दोस्तों-परिवार के बीच इसकी तारीफ और प्रमोट करना शुरू कर दिया. जब लोग आपके ब्रांड एंबेसडर बन जाते हैं, तो आपको प्रमोशन की जरूरत नहीं पड़ती."
हनुमान अंश की कहानी
2026 में रिलीज हुई हनुमान अंश भक्ति-बायोपिक फिल्म है, जो प्रसिद्ध संत नीम करोली बाबा (महाराज जी) के बचपन और आध्यात्मिक यात्रा पर आधारित है. फिल्म की कहानी 13 साल के लड़के लक्ष्मी नारायण शर्मा से शुरू होती है, जो ब्रज क्षेत्र के अकबरपुर गांव का रहने वाला है. वहीं मां के निधन के बाद वह भगवान राम को ढूंढने के लिए निकलता है ताकि वह अपनी माँ से दोबारा मिल सकेगा. इसके चलते वह हनुमान चालीसा पढ़कर वह सोचता है कि हनुमान जी ही उसे राम तक पहुंचा सकते हैं, क्योंकि हनुमान राम के सबसे बड़े भक्त हैं. इसी सोच के साथ वह घर छोड़कर अपने सफर निकल पड़ता है, जिसकी कहानी को फिल्म में दिखाया गया है.