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किसानों का नया व्यापार बना "मधुमक्खी पालन", एक ही खेत से मिलेगा डबल मुनाफा! सरकार दे रही है लाखों की मदद
मधुमक्खी पालन व्यवसाय की सबसे बड़ी खूबी इसकी कम लागत और अधिक मुनाफा है. करीब 2 लाख रुपए की शुरुआती लागत से तैयार होने वाली एक यूनिट पर सरकार 40 प्रतिशत तक का अनुदान दे रही है. इससे किसानों पर शुरुआती निवेश का आर्थिक बोझ काफी कम हो जाता है. उपनिदेशक उद्यान शंकर सिंह ने बताया कि इस योजना के तहत 50 बॉक्स और 50 कॉलोनी के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है. इस व्यवसाय के लिए खेत या बगीचा होना अनिवार्य है, क्योंकि मधुमक्खियां फसलों और पेड़ों पर खिलने वाले फूलों से मकरंद (Nechter) एकत्र कर शहद बनाती हैं.
फसल के साथ शहद का ‘डबल धमाका’
भीलवाड़ा के मांडल निवासी आशुतोष व्यास इस बदलाव के बड़े उदाहरण हैं. उन्होंने विभाग से प्रशिक्षण लेने के बाद अपने खेत पर 50 बॉक्स के साथ यूनिट शुरू की. दिसंबर और जनवरी के दौरान सरसों की फसल के फूलों से उन्हें हर महीने प्रति बॉक्स 30 किलो से अधिक शहद प्राप्त हुआ. वर्तमान में उनका शहद घर बैठे 600 रुपए प्रति किलो की दर से बिक रहा है. खास बात यह है कि जब फूलों का सीजन नहीं होता, तब मधुमक्खियों को जीवित रखने के लिए शक्कर के घोल का भोजन दिया जाता है. मधुमक्खियां खुद-ब-खुद फूलों से मधु लाने और उसे छत्ते में सुखाने का काम करती हैं, इंसान को केवल शहद एकत्र करना होता है.
बगीचों में मुनाफे की मिठास
UP में SMART मीटर को लेकर एक्शन में CM योगी, 24 घंटे में जवाब नहीं दिया तो होगा सख्त एक्शन
उत्तर प्रदेश में ये सोचकर स्मार्ट मीटर लगाए गए थे कि इससे बिजली उपभोक्ताओं को आसानी होगी. लेकिन हुआ उल्टा. स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनके बिल में गड़बड़ियां होने लगीं. जिसके बाद इसकी शिकायतें की गईं. सरकार से इनको वापस लेने की मांग की गई. जिसके बाद सीएम योगी तुरंत एक्शन मोड में आ गए. उनके आदेश पर अब सभी प्रीपेड मीटर पोस्टपेड स्मार्ट मीटर में बदले जा रहे हैं. भले ही पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने सोमवार को प्रीपेड स्मार्ट मीटर की व्यवस्था को खत्म कर दिया हो लेकिन अब तक मीटर को लेकर उठे सवालों का जवाब नहीं दिया है. जिससे आयोग गुस्से में हैं.
दरअसल सीएम योगी के सख्त रुख के बाद पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन को 10 दिन के भीतर विद्युत नियामक आयोग को मीटर को लेकर उठे सवालों का जवाब देना था. लेकिन ये समय सीमा निकल चुकी है. 20 दिन बीजने के बाद भी इसे लेकर कोई जवाब नहीं दिया गया. आयोग इस मामले पर अब सख्त हो गया है. उसने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन को जवाब के लिए 24 घंटे में तलब किया है. अगर उसने जवाब नहीं दिया तो उसके खिलाफ आयोग की तरफ से दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है.
इस बीच उपभोक्ता परिषद ने मांग उठाई है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता को खत्म करने संबंधी आदेश जारी किया जाए. उपभोक्ता परिषद ने प्रीपेड स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतें सामने आने के बाद पिछले महीने आयोग में याचिका दाखिल की थी. आयोग ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन से 16 अप्रैल को जबाव देने के लिए 10 दिन की मोहलत दी थी. इस हिसाब से 26 अप्रल तक जवाब दिया जाना था लेकिन ये तारीख कब की निकल गई. अब तो पूरा अप्रैल खत्म हो चुका है और मई के भी 6 दिन निकल चुके हैं. अब तक जवाब दाखिल नहीं किया गया है. इस लापरवाही से आयोग गुस्से में है. उसने सख्ती बरतते हुए 24 घंटे में जवाब तलब किया है.
निर्धारित समय सीमा में जवाब न देकर पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने विद्युत अधिनियम 2003 की की धारा 47(5) और भारत सरकार और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया है. ये बात कही है उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष ने. उन्होंने कहा कि बिजली कंपनियों को आयोग के निर्देशों के मुताबिक ही काम करना चाहिए. लेकिन नियमों के खिलाफ नए बिजली कनेक्शन प्रीपेड मोड में दिए गए. साथ ही मौजूदा पोस्टपेड कनेक्शनों को बिना उपभोक्ताओं की सहमति के प्रीपेड कनेक्शन में बदला गया. उन्होंने आयोग कॉरपोरेशन प्रबंधन के खलाफ दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है.
लोगों की शिकायतों के बाद प्रीपेड मीटर लगवाने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है. वहीं इन मीटरों को पोस्टपेड स्मार्ट मीटर में बदला जा रहा है. इसके साथ ही पहले की तरह ही बिजली बिल में बिल जमा करने की तिथि लिखी रहेगी. इसके साथ ही उपभोक्ताओं को अपना बकाया भुगतान 10 किस्तों में करने की बड़ी राहत भी दी गई है. बिलिंग साइकिल वैसे ही रहेगा जैसे पहले पोस्टपेड मीटर में होता था.
किस CM को मिलती है सबसे ज्यादा सैलरी, CM सुवेंदु अधिकारी की कितनी है शिक्षा? CM बनने पर कितनी मिलेगी सैलरी और सुविधाएं,
जानें पश्चिम बंगाल के कद्दावर नेता सुवेंदु अधिकारी कितने पढ़े-लिखे हैं. साथ ही पढ़ें मुख्यमंत्री बनने पर उन्हें कितनी सैलरी, बंगला और लग्जरी गाड़ियां मिलेंगी.
Suvendu Adhikari Education : पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है. भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता सुवेंदु अधिकारी राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के लिए तैयार हैं. आपको बता दें कि 2021 में नंदीग्राम सीट से और अब यानी 2026 में भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी को हराकर इतिहास रचने वाले सुवेंदु अधिकारी की इस जीत ने देशभर का ध्यान खींचा है. ऐसे में आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि बंगाल की कमान संभालने वाले सुवेंदु अधिकारी कितने पढ़े-लिखे हैं और बतौर मुख्यमंत्री उन्हें क्या वेतन और सरकारी सुविधाएं मिलेंगी.
सुवेंदु अधिकारी न केवल एक मंझे हुए राजनेता हैं, बल्कि शैक्षिक रूप से भी काफी समृद्ध हैं. उनके चुनावी हलफनामे के अनुसार:
स्कूली शिक्षा उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई कंठी हाई स्कूल से पूरी की. वहीं, कंठी के प्रभात कुमार कॉलेज (विद्यासागर विश्वविद्यालय) से कला स्नातक (BA) की डिग्री हासिल की. जबकि 2011 में रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ आर्ट्स (MA) की डिग्री प्राप्त की.
बहुत से लोग मानते हैं कि देशभर के मुख्यमंत्रियों की सैलरी एक जैसी होती होगी, लेकिन असलियत इससे बिल्कुल अलग है. भारत में मुख्यमंत्री की सैलरी केंद्र सरकार तय नहीं करती है. संविधान के अनुच्छेद 164(5) के तहत हर राज्य की विधानसभा अपने मुख्यमंत्री और मंत्रियों की सैलरी तय कर सकती है. यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों में सीएम की तनख्वाह में बड़ा अंतर देखने को मिलता है.
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री का कुल मासिक वेतन लगभग 2,10,000 रुपये होता है. इसमें मूल वेतन के साथ-साथ निर्वाचन क्षेत्र भत्ता और प्रतिपूरक भत्ता जैसे कई घटक शामिल होते हैं. इसके अलावा-
मुख्यमंत्री को मिलने वाली कुल सुविधाओं का आंकलन सैलरी से नहीं किया जा सकता है. दरअसल, मुख्यमंत्री को सिर्फ हर महीने मिलने वाली तनख्वाह ही नहीं मिलती, बल्कि इसके साथ कई तरह की सरकारी सुविधाएं और भत्ते भी जुड़े होते हैं. इनमें सरकारी बंगला, सुरक्षा, स्टाफ, यात्रा सुविधा, मेडिकल सुविधा और दूसरे कई खास भत्ते शामिल होते हैं. कई राज्यों में ये सुविधाएं इतनी बड़ी होती हैं कि असली पैकेज सैलरी से कहीं ज्यादा हो जाता है.
अगर हालिया चुनावों में सबसे ज्यादा चर्चा में रहे राज्यों की बात करें, तो पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री की सैलरी लगभग एक-दूसरे के बेहद करीब मानी जाती है. पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री को हर महीने करीब 2.10 लाख रुपए की सैलरी मिलती है. वहीं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री की सैलरी लगभग 2.05 लाख रुपए बताई जाती है. यानी दोनों के बीच ज्यादा बड़ा अंतर नहीं है. केरल की बात करें तो वहां के सीएम की सैलरी करीब 1.85 लाख होटी है. असम के मुख्यमंत्री की सैलरी इन तीनों राज्यों से कुछ कम है. हालांकि अलग-अलग सोर्सेज और समय-समय पर हुए संशोधनों की वजह से आंकड़ों में थोड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.
अगर पूरे देश की बात करें तो तेलंगाना देश के उन राज्यों में शामिल है, जहां मुख्यमंत्री को सबसे ज्यादा सैलरी मिलती है. यहां सीएम की सैलरी और भत्ते मिलाकर रकम करीब 4 लाख रुपए महीने तक पहुंच जाती है. इसके अलावा दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी मुख्यमंत्रियों को ज्यादा सैलरी और सुविधाएं मिलती हैं. अगर पूरे देश की तस्वीर देखें तो भारत में मुख्यमंत्रियों की मंथली सैलरी करीब 1.25 लाख रुपए से लेकर 4 लाख रुपए तक पहुंचती है. अलग-अलग राज्यों में सैलरी और भत्ते अलग होने की वजह से यह अंतर काफी बड़ा दिखाई देता है.
PM मोदी ने किसके छुए पैर, CM शुभेंदु की शपथ में जिस बुजुर्ग के पैर छुए, वो कौन हैं? जानिए "माखनलाल सरकार" के बारे में 
PM काफी देर तक उन बुजुर्ग से बात करते रहे और गले लगाए रखा. PM मोदी के इस कदम ने सबके मन में एक सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर ये बुजुर्ग कौन हैं जिनके सम्मान में PM मोदी ने अपना सिर झुका दिया. तो आइए आपको भी बता देते हैं.
मौका था शुभेंदु अधिकारी के शपथग्रहण समारोह का, कोलकाता का ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड और दूर तक फैला लोगों का हुजूम. इस बीच मंच से आई एक तस्वीर ने सबका ध्यान खींच लिया. PM मोदी ने एक बुजुर्ग व्यक्ति को शॉल ओढ़ाई, और पैर छूकर उन्हें गले लगा लिया. यही नहीं PM काफी देर तक उन बुजुर्ग से बात करते रहे और गले लगाए रखा. PM मोदी के इस कदम ने सबके मन में एक सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर ये बुजुर्ग कौन हैं जिनके सम्मान में PM मोदी ने अपना सिर झुका दिया. तो आइए आपको भी बता देते हैं.
बंगाल में BJP सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में भाजपा के सबसे वरिष्ठ कार्यकर्ताओं में से एक माखनलाल सरकार का अभिनंदन किया और उनका आशीर्वाद लिया. 1952 में, माखनलाल सरकार को कश्मीर में तब गिरफ्तार किया गया था जब वे वहां भारतीय तिरंगा फहराने के आंदोलन के दौरान श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ थे. 98 साल की आयु में, माखनलाल सरकार आज़ादी के बाद के भारत में राष्ट्रवादी आंदोलन से जुड़े शुरुआती ज़मीनी स्तर के लोगों में से एक हैं.
श्यामा प्रसाद मुखर्जी के मित्र
98 साल के माखनलाल सरकार सिलीगुड़ी के रहने वाले हैं. वह श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सहयोगी थे, उनकी अंतिम यात्रा का हिस्सा थे. उन्हें कांग्रेस के अधीन दिल्ली पुलिस द्वारा राष्ट्रवाद गीत गाने के लिए गिरफ्तार किया गया था. उन्होंने कोर्ट में माफी मांगने से इनकार कर दिया. उन्होंने अदालत में वही गाना गाया और न्यायाधीश ने उन्हें घर वापस आने के लिए प्रथम श्रेणी का टिकट और यात्रा के लिए 100 रुपये देने को कहा.
1980 में भाजपा के गठन के बाद, वह पश्चिम दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग जिलों के संगठनात्मक समन्वयक बने. केवल एक वर्ष के भीतर, उन्होंने लगभग 10,000 सदस्यों को नामांकित करने में मदद की. 1981 के बाद से, उन्होंने लगातार सात वर्षों तक जिला अध्यक्ष के रूप में कार्य किया, यह उस समय एक असाधारण उपलब्धि थी, जब भाजपा नेता आम तौर पर दो साल से अधिक समय तक एक ही संगठनात्मक पद पर नहीं रह सकते थे.
पुलिस लाइन में ड्यूटी लगाने के नाम पर रिश्वतखोरी के आरोप, जांच के आदेश
उत्तर प्रदेश पुलिस के एक सिपाही द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में 2015 बैच के सिपाही सुनील कुमार शुक्ला ने पुलिस लाइन में ड्यूटी लगाने के बदले रिश्वत वसूली का आरोप लगाया है। सिपाही का दावा है कि पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत से भ्रष्टाचार का एक नेटवर्क संचालित किया जा रहा है, जिसमें गार्द कमांडर, गणना प्रभारी, आरआई समेत कई अधिकारी शामिल हैं।
वायरल वीडियो में सिपाही ने आरोप लगाया कि पुलिस लाइन में ए, बी, सी, डी नाम से गणना है। पुलिस लाइन में तैनात कर्मियों से मनचाही ड्यूटी लगाने के नाम पर प्रति माह दो-दो हजार रुपये वसूले जाते हैं। उसके अनुसार, आरआई द्वारा गणना प्रभारी नियुक्त किया जाता है और गणना प्रभारी के माध्यम से गार्द कमांडर यह वसूली करता है। सिपाही ने दावा किया कि एक गणना में करीब 400 से 500 पुलिसकर्मी तैनात होते हैं, जिससे केवल एक गणना से ही लाखों रुपये की अवैध वसूली संभव है।
पुलिस आयुक्त ने एडीसीपी लाइन को दिए जांच के आदेश
मामला सामने आने के बाद पुलिस आयुक्त ने पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। एडीसीपी लाइन राजेश यादव को जांच सौंपी गई है। वहीं एसीपी लाइन शिप्रा पांडेय ने दावा किया है कि गार्द ड्यूटी के लिए निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन कराया जाता है और अधिकारियों द्वारा इसकी नियमित निगरानी भी की जाती है।
लाइन में यह खेल भी चलता है
इतना ही नहीं, सूत्रों के अनुसार मनचाही ड्यूटी के अलावा, ड्यूटी से बचने या बिना लिखापढ़ी के अनुपस्थित रहने के लिए भी पांच-पांच हजार रुपये तक लिए जाने का खेल चलता है। आरोप है कि कई दरोगा और सिपाही हर माह यह रकम देकर ड्यूटी से गायब रहते हैं।
बताया जा रहा है कि सिपाही सुनील मूल रूप से अमेठी का रहने वाला है। उसकी पत्नी भी रायबरेली में सिपाही के पद पर कार्यरत है। सिपाही सुनील कुमार शुक्ला ने पूर्व में 45 दिनों की छुट्टी मांगी थी, लेकिन उन्हें केवल 20 दिन की छुट्टी स्वीकृत हुई थी। इसके बाद उनका वीडियो वायरल होने से पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट और संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं।