महिला डॉक्टर ने शेरनी को किया पस्त, पिंजरे में घुसकर नरभक्षी बाघिन को किया काबू, 3 महीने से दहशत में थे ग्रामीण
पिंजरे के अंदर से देखने का दायरा बेहद सीमित और चुनौतीपूर्ण था, लेकिन जैसे ही बाघिन शिकार के पास वापस लौटी, डॉ. प्रियल ने अचूक निशाना लगाकर उसे ट्रैंक्विलाइज यानी बेहोश कर दिया.
महिला डॉक्टर ने बाघिन को किया बेहोश
नागपुर की वेटनरी महिला डॉक्टर प्रियल चौरागड़े की जांबाजी के चर्चे अब हर ओर हो रहे हैं. उन्होंने 15 घंटे के इंतजार के बाद 2 लोगों की जान लेने वाली खूंखार बाघिन को वश में जो कर लिया. डॉक्टर ने पिंजरे में बैठ उसे बेहोश कर दिया. ये कोई आसान बात नहीं है. पिछले दो-तीन महिने से बाघिन किसी की पकड़ में नहीं आ रही थी. हर कोशिश नाकाम हो रही थी. समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए. लेकिन डॉक्टर प्रियल ने वो कर दिखाया जो अब तक वन विभाग भी नहीं कर सका. वो तो बहुत ही बहादुर निकलीं. जिस बाघिन से लोग थर-थर कांप रहे थे, उन्होंने पल भर में उसकी दहशत को ही खत्म कर दिया.
पिंजरे में
बैठकर नरभक्षी बाघिन को पकड़ा
महाराष्ट्र की पहली महिला वेटनरी डॉक्टर ने आदमखोर बाघिन को बेहोश कर पिंजरे में कैद कर लिया. जिसके बाद कई महीनों की दहशत आखिरकार खत्म हो गई. डॉ. प्रियल ने खूंखार बाघिन के सामने हार नहीं मानी. वह पिंजरे में डंटी रहीं और करीब 15 मिनट की मशक्कत के बाद आदमखोर बाघिन को बेहोश करने में कामयाब रहीं. उन्होंने इस दौरान अपनी जान की भी परवाह नहीं की. आदमखोर बाघिन उन पर भी हमला कर सकती थी लेकिन डॉक्टर प्रियल ने ये सब न सोचकर उसको पकड़ने पर अपना ध्यान लगाए रखा.
3 महीने से दहशत में थे गांववाले
महिला डॉक्टर ने अपनी जान पर खेलकर बाघिन को आखिरकार पिंजरे में कैद किया. दरअसल ये ढाई-तीन साल की बाघिन नागपुर के उमरेड वन परिक्षेत्र में पिछले कई महीनों से दहशत फैला रही थी. उसने 27 मार्च को निर्मला गभणे और 6 जून को दिगंबर पाटिल की खेत में काम करते वक्त हमलाकर जान ले ली थी. वहीं दो-तीन अन्य लोगों को घायल भी किया था. गांव वाले इतने खौफजदा थे कि उन्होंने हाल ही में चक्काजाम कर भारी विरोध भी जताया था.

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