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*🌞सुप्रभातम🌞*
*आज का पञ्चांग*
*दिनांक:- 06/03/2026, शुक्रवार
*तृतीया, कृष्ण पक्ष,*
*चैत्र*
(समाप्ति काल)
तिथि----------- तृतीया 17:52:46. तक
पक्ष-------------------------- कृष्ण
नक्षत्र------------- हस्त 09:28:54
योग------------- गण्ड 07:04:31
करण------- विष्टि भद्र 17:52:46
करण-------------- बव 30:30:36
वार----------------------- शुक्रवार
माह-------------------------- चैत्र
चन्द्र राशि-------कन्या 22:17:41
चन्द्र राशि------------------ तुला
सूर्य राशि------------------- कुम्भ
रितु‐------------------------- वसंत
आयन------------------- उत्तरायण
संवत्सर------------------ विश्वावसु
संवत्सर (उत्तर)------------- सिद्धार्थी
विक्रम संवत---------------- 2082
गुजराती संवत-------------- 2082
शक संवत------------------ 1947
कलि संवत----------------- 5126
सूर्योदय--------------- 06:39:56
सूर्यास्त---------------- 18:21:20
दिन काल------------- 11:41:24
रात्री काल------------- 12:17:32
चंद्रास्त---------------- 08:00:25
चंद्रोदय--------------- 21:10:28
लग्न----कुम्भ 21°15' , 321°15'
सूर्य नक्षत्र------------ पूर्वाभाद्रपद
चन्द्र नक्षत्र--‐----------------- हस्त
नक्षत्र पाया------------------- रजत
*🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩*
ठ---- हस्त 09:28:54
पे---- चित्रा 15:52:15
पो---- चित्रा 22:17:41
रा---- चित्रा 28:45:09
*💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮*
ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
============================
सूर्य= कुम्भ 21°10 , पूoफाo 1 से
चन्द्र= कन्या 21°30 , हस्त. 4 ठ
बुध = कुम्भ 24°52 ' पूo भाo 2 सो
शु क्र= मीन 05°05, उo भाo 1 दू
मंगल= कुम्भ 08°12°03शतभिषा 1 के
गुरु= मिथुन 20°33 पुनर्वसु, 1 के
शनि=मीन 08°13 ' उoभा o , 2 थ
राहू=(व) कुम्भ 14°38 शतभिषा, 3 सी
केतु= (व) सिंह 14°38 पूoफाo 1 मो
============================
*🚩💮🚩 शुभा$शुभ मुहूर्त 🚩💮🚩*
राहू काल 11:03 - 12:31 अशुभ
यम घंटा 15:26 - 16:54 अशुभ
गुली काल 08:08 - 09:35 अशुभ
अभिजित 12:07 - 12:54 शुभ
दूर मुहूर्त 09:00 - 09:47 अशुभ
दूर मुहूर्त 12:54 - 13:41 अशुभ
वर्ज्यम 18:01 - 19:43 अशुभ
प्रदोष 18:21 - 20:51 शुभ
💮चोघडिया, दिन
चर 06:40 08:08 शुभ
लाभ 08:08 - 09:35 शुभ
अमृत 09:35 - 11:03 शुभ
काल 11:03 12:31 अशुभ
शुभ 12:31 13:58 शुभ
रोग 13:58 - 15:26 अशुभ
उद्वेग 15:26 - 16:54 अशुभ
चर 16:54 18:21 शुभ
🚩चोघडिया, रात
रोग 18:21 - 19:54 अशुभ
काल 19:54 21:26 अशुभ
लाभ 21:26 22:58 शुभ
उद्वेग 22:58 - 24:30* अशुभ
शुभ 24:30* -26:02* शुभ
अमृत 26:02* - 27:34* शुभ
चर 27:34*- 29:07* शुभ
रोग 29:07* - 30:39* अशुभ
💮होरा, दिन
शुक्र 06:40- 07:38
बुध 07:38- 08:37
चन्द्र 08:37- 09:35
शनि 09:35 -10:34
बृहस्पति 10:34- 11:32
मंगल 11:32 -12:31
सूर्य 12:31 -13:29
शुक्र 13:29 -14:28
बुध 14:28 -15:26
चन्द्र 15:26 -16:24
शनि 16:24- 17:23
बृहस्पति 17:23- 18:21
🚩होरा, रात
मंगल 18:21 -19:23
सूर्य 19:23- 20:24
शुक्र 20:24- 21:26
बुध 21:26- 22:27
चन्द्र 22:27- 23:29
शनि 23:29 -24:30
बृहस्पति 24:30-25:32
मंगल 25:32 -26:33
सूर्य 26:33-27:34
शुक्र 27:34-28:36
बुध 28:36-29:37
चन्द्र 29:37-30:39
*🚩उदयलग्न प्रवेशकाल 🚩*
कुम्भ > 05:34 से 07:14 तक
मीन > 07:14 से 08:38 तक
मेष > 08:38 से 10:14 तक
वृषभ > 10:14 से 12:12 तक
मिथुन > 12:12 से 15:38 तक
कर्क > 15:38 से 16:48 तक
सिंह > 16:48 से 18:54 तक
कन्या > 18:54 से 21:14 तक
तुला > 21:14 से 23:33 तक
वृश्चिक > 23:36 से 01:46 तक
धनु > 01:46 से 03:36 तक
मकर > 03:36 से 05:32 तक
=======================
*🚩विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार*
(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट--------- जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट------ अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट------------ मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट--------बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54-----जैसलमेर -15 मिनट
*नोट*-- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।
*💮दिशा शूल ज्ञान------------- पश्चिम*
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा काजू खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
*शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l*
*भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll*
*🚩 अग्नि वास ज्ञान -:*
*यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,*
*चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।*
*दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,*
*नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।।* *महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्*
*नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।*
15 + 3 + 6 + 1 = 25 ÷ 4 = 1 शेष
पाताल लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l
*🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩*
सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है
मंगल ग्रह मुखहुति
*💮 शिव वास एवं फल -:*
18 + 18 + 5 = 41 ÷ 7 = 6 शेष
क्रीड़ायां = शोक, दुःख कारक
*🚩भद्रा वास एवं फल -:*
*स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।*
*मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।*
सांय 17:53 समाप्त
पाताल लोक = धनलाभ कारक
*💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮*
*चतुर्थी व्रत चंद्रोदय 21:12*
*💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮*
पठन्ति चतुरो वेदान् धर्मशास्त्राण्यनेकशः ।
आत्मानं नैव जानन्ति दवी पाकरसं यथा ।।
।।चाoनीo।।
एक व्यक्ति को चारो वेद और सभी धर्मं शास्त्रों का ज्ञान है. लेकिन उसे यदि अपने आत्मा की अनुभूति नहीं हुई तो वह उसी चमचे के समान है जिसने अनेक पकवानों को हिलाया लेकिन किसी का स्वाद नहीं चखा.
*🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩*
गीता -: कर्मसांख्ययोग अo-5
तद्बुद्धयस्तदात्मानस्तन्निष्ठास्तत्परायणाः।
गच्छन्त्यपुनरावृत्तिं ज्ञाननिर्धूतकल्मषाः॥
जिनका मन तद्रूप हो रहा है, जिनकी बुद्धि तद्रूप हो रही है और सच्चिदानन्दघन परमात्मा में ही जिनकी निरंतर एकीभाव से स्थिति है, ऐसे तत्परायण पुरुष ज्ञान द्वारा पापरहित होकर अपुनरावृत्ति को अर्थात परमगति को प्राप्त होते हैं
॥17॥
*💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮*
देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।
🐏मेष
पार्टी व पिकनिक का कार्यक्रम बन सकता है। स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद प्राप्त होगा। विद्यार्थी वर्ग सफलता हासिल करेगा। कारोबार में वृद्धि होगी। आय के नए स्रोत प्राप्त हो सकते हैं। नौकरी में कार्य की प्रशंसा होगी। नए विचार दिमाग में आएंगे। भाग्य का साथ मिलेगा। धनार्जन होगा।
🐂वृष
कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। काम में मन नहीं लगेगा। दूसरे आपसे अधिक की अपेक्षा करेंगे व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा। दु:खद समाचार प्राप्त हो सकता है। वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। क्रोध व उत्तेजना पर नियंत्रण रखें। पुराना रोग उभर सकता है।
👫मिथुन
प्रयास सफल रहेंगे। पराक्रम वृद्धि होगी। सामाजिक कार्य करने का अवसर प्राप्त होगा। मान-सम्मान मिलेगा। कारोबार में वृद्धि होगी। निवेश शुभ रहेगा। नौकरी में कार्य की प्रशंसा होगी। आय में वृद्धि होगी। जल्दबाजी न करें। प्रतिद्वंद्विता में वृद्धि होगी। लाभ होगा।
🦀कर्क
व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में निश्चितता रहेगा।अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। विवाद से स्वाभिमान को ठेस पहुंच सकती है। पुराना रोग उभर सकता है। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। किसी भी अपरिचित व्यक्ति की बातों में न आएं।
🐅सिंह
अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। नौकरी में अधिकार वृद्धि हो सकती है। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। निवेश मनोनकूल रहेगा। घर-बाहर प्रसन्नता का वातावरण बनेगा। किसी कार्य के प्रति चिंता रहेगी। शारीरिक कष्ट संभव है।
🙍♀️कन्या
दूर से शुभ समाचार प्राप्त होंगे। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। घर में अतिथियों का आगमन होगा। प्रसन्नता तथा उत्साह बने रहेंगे। व्यापार-व्यवसाय मनोनुकूल लाभ देगा। आलस्य हावी रहेगा। प्रमाद न करें। विवेक का प्रयोग करें।
⚖️तुला
यात्रा में जल्दबाजी न करें। शारीरिक कष्ट संभव है। पुराना रोग उभर सकता है। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। हंसी-मजाक में हल्कापन न हो, ध्यान रखें। कीमती वस्तुएं इधर-उधर हो सकती हैं, संभालकर रखें। व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में निश्चितता रहेगी।
🦂वृश्चिक
धर्म-कर्म में रुचि रहेगी। कोर्ट व कचहरी के काम मनोनुकूल लाभ देंगे। किसी बड़े काम की रुकावट दूर होगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा। पारिवारिक सहयोग प्राप्त होगा। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। दूसरों के कार्य में हस्तक्षेप न करें।
🏹धनु
नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। मान-सम्मान मिलेगा। आय के नए स्रोत प्राप्त हो सकते हैं। व्यापार-व्यवसाय में मनोनुकूल लाभ होगा। शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड इत्यादि से लाभ होगा। प्रेम-प्रसंग में जल्दबाजी न करें। थकान रहेगी। किसी कार्य की चिंता रहेगी।
🐊मकर
बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा। नौकरी में अनुकूलता रहेगी। भाग्य का साथ मिलेगा। कोई बड़ा काम करने की इच्छा जागृत होगी। चिंता तथा तनाव बने रहेंगे। प्रमाद न करें।
🍯कुंभ
स्थायी संपत्ति के कार्य बड़ा लाभ दे सकते हैं। रोजगार में वृद्धि होगी। आय के नए साधन प्राप्त हो सकते हैं। भाग्योन्नति के प्रयास सफल रहेंगे। जीवन सुखमय व्यतीत होगा। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। स्वास्थ्य में राहत मिलेगी। चिंता दूर होगी। नौकरी में रुतबा बढ़ेगा।
🐟मीन
धनहानि की आशंका है। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। थकान व कमजोरी रह सकती है। व्यापार व व्यवसाय ठीक चलेगा। नौकरी में चैन रहेगा। यात्रा मनोरंजक रहेगी। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। राजकीय बाधा दूर होकर स्थिति अनुकूल बनेगी। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी।
*🚩आपका दिन मंगलमय हो🚩**🚩जय श्री सीताराम जी की* 🚩
*बाल काँण्ड*
*आप सभी श्री सीतारामजीके भक्तों को प्रणाम करता हूँ*
🌹🙏🙏🙏🙏🙏🌹
*अगुन सगुन दुइ ब्रह्म सरूपा।*
*अकथ अगाध अनादि अनूपा॥*
*मोरें मत बड़ नामु दुहू तें।*
*किए जेहिं जुग निज बस निजबूतें।।*
भावार्थ:-निर्गुण और सगुण ब्रह्म के दो स्वरूप हैं। ये दोनों ही अकथनीय, अथाह, अनादि और अनुपम हैं। मेरी सम्मति में नाम इन दोनों से बड़ा है, जिसने अपने बल से दोनों को अपने वश में कर रखा है॥1॥
*प्रौढ़ि सुजन जनि जानहिं जन की।*
*कहउँ प्रतीति प्रीति रुचि मन की॥*
*एकु दारुगत देखिअ एकू।*
*पावक सम जुग ब्रह्म बिबेकू॥2॥*
भावार्थ:-सज्जन व्यक्ति इस बात को मुझ दास की धृष्टता या कल्पना न समझें, मैं अपने मन के विश्वास, प्रेम और रुचि की बात कहता हूँ। निर्गुण ब्रह्म का ज्ञान उस अप्रकट अग्नि के समान है, जो लकड़ी के अंदर है परन्तु दिखती नहीं है और सगुण ब्रह्म उस प्रकट अग्नि के समान है, जो प्रत्यक्ष दिखलाई देती है।2
*उभय अगम जुग सुगम नाम तें।*
*कहेउँ नामु बड़ ब्रह्म राम तें॥*
*ब्यापकु एकु ब्रह्म अबिनासी।*
*सत चेतन घन आनँद रासी॥3॥*
भावार्थ:-निर्गुण और सगुण ब्रह्म दोनों ही जानने में सुगम नहीं हैं, लेकिन नाम जप से दोनों को आसानी से जाना जा सकता हैं, इसी कारण मैंने, राम नाम को निर्गुण ब्रह्म और सगुण ब्रह्म राम से बड़ा कहा है, जबकि ब्रह्म एक ही है जो कि व्यापक, अविनाशी, सत्य, चेतन और आनंद की खान है।3
*अस प्रभु हृदयँ अछत अबिकारी*।
*सकल जीव जग दीन दुखारी॥*
*नाम निरूपन नाम जतन तें।*
*सोउ प्रगटत जिमि मोल रतन तें॥4*॥
भावार्थ:-ऐसे विकाररहित प्रभु के हृदय में रहते भी जगत के सब जीव दीन और दुःखी हैं। नाम का निरूपण करके (नाम के यथार्थ स्वरूप, महिमा, रहस्य और प्रभाव को जानकर) नाम का जतन करने से (श्रद्धापूर्वक नाम जप रूपी साधन करने से) वही ब्रह्म ऐसे प्रकट हो जाता है, जैसे रत्न के जानने से उसका मूल्य॥4॥
*दोहा निरगुन तें एहि भाँति बड़*
*नाम प्रभाउ अपार*।
*कहउँ नामु बड़ राम तें*
*निज बिचार अनुसार॥23॥*
भावार्थ:-इस प्रकार निर्गुण से नाम का प्रभाव अत्यंत बड़ा है। अब अपने विचार के अनुसार कहता हूँ, कि नाम (सगुण) राम से भी बड़ा है॥23॥क्रमशः ',,,,,,,,,,
*🚩जय श्री सीताराम जी की*🚩

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