कच्चे तेल में फूटा महंगाई बम, ढाई साल के रिकॉर्ड लेवल पर पहुंचा भाव, क्या पेट्रोल-डीजल के दाम भी बढ़ेंगे?
मध्य पूर्व के युद्ध से कच्चे तेल में उछाल, होली के बाद पेट्रोल-डीजल महंगा होने की आशंकामध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध संकट का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत ट्रेडिंग के दौरान बढ़कर 94.51 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो पिछले करीब ढाई साल का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है।हालांकि बाद में कीमतों में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई, लेकिन कच्चे तेल की तेजी ने भारत समेत कई देशों की चिंता बढ़ा दी है।8 दिनों में 35% तक बढ़ी कीमतपेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 5 मार्च 2026 को भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की औसत कीमत 93.41 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।फरवरी 2026 में यही कीमत 69.01 डॉलर प्रति बैरल थी। यानी महज 8 दिनों में करीब 35% की ऐतिहासिक तेजी देखने को मिली है। विशेषज्ञों के मुताबिक मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है।भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंताभारत अपनी कुल तेल जरूरतों का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर देश के आयात बिल और व्यापार घाटे पर पड़ता है। कच्चे तेल की कीमत में हर एक डॉलर की बढ़ोतरी भारत पर हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ डाल सकती है।पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर असर संभवविशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 95 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर लंबे समय तक बना रहता है, तो सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 5 से 7 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव दे सकती हैं।डीजल महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी, जिसका असर फल-सब्जी और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।फिलहाल सरकार ‘वेट एंड वॉच’ मोड मेंकेंद्र सरकार का कहना है कि फिलहाल भारत के पास पर्याप्त कच्चे तेल का स्टॉक मौजूद है, इसलिए तुरंत किसी बड़े संकट की आशंका नहीं है। जरूरत पड़ने पर सरकार एक्साइज ड्यूटी घटाकर राहत दे सकती है या कीमतों को बाजार के अनुसार तय होने दे सकती है।फिलहाल दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर हैं, लेकिन अगर मध्य पूर्व का युद्ध लंबा चलता है, तो होली के बाद आम जनता को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का झटका लग सकता है।
मध्य पूर्व के युद्ध से कच्चे तेल में उछाल, होली के बाद पेट्रोल-डीजल महंगा होने की आशंका
मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध संकट का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत ट्रेडिंग के दौरान बढ़कर 94.51 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो पिछले करीब ढाई साल का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है।
हालांकि बाद में कीमतों में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई, लेकिन कच्चे तेल की तेजी ने भारत समेत कई देशों की चिंता बढ़ा दी है।
8 दिनों में 35% तक बढ़ी कीमत
पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 5 मार्च 2026 को भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की औसत कीमत 93.41 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।
फरवरी 2026 में यही कीमत 69.01 डॉलर प्रति बैरल थी। यानी महज 8 दिनों में करीब 35% की ऐतिहासिक तेजी देखने को मिली है। विशेषज्ञों के मुताबिक मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है।
भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता
भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर देश के आयात बिल और व्यापार घाटे पर पड़ता है। कच्चे तेल की कीमत में हर एक डॉलर की बढ़ोतरी भारत पर हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ डाल सकती है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर असर संभव
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 95 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर लंबे समय तक बना रहता है, तो सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 5 से 7 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव दे सकती हैं।
डीजल महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी, जिसका असर फल-सब्जी और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल सरकार ‘वेट एंड वॉच’ मोड में
केंद्र सरकार का कहना है कि फिलहाल भारत के पास पर्याप्त कच्चे तेल का स्टॉक मौजूद है, इसलिए तुरंत किसी बड़े संकट की आशंका नहीं है। जरूरत पड़ने पर सरकार एक्साइज ड्यूटी घटाकर राहत दे सकती है या कीमतों को बाजार के अनुसार तय होने दे सकती है।
फिलहाल दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर हैं, लेकिन अगर मध्य पूर्व का युद्ध लंबा चलता है, तो होली के बाद आम जनता को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का झटका लग सकता है।
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