पितृपक्ष में भूलकर भी न करें ये 7 काम, नाराज हो सकते हैं पितर?
पितृपक्ष में पूर्वजों के श्राद्ध और तर्पण का विशेष महत्व माना जाता है. आचार्य मदनमोहन ने बताया कि इन दिनों शुभ काम, मांस-मदिरा, कलह, अपशब्द और असहायों को परेशान करने से बचना चाहिए. जानें पितृपक्ष के 7 जरूरी नियम.शुभ काम करने से बचें
आचार्य मदनमोहन ने बताया कि पितृपक्ष को पूर्वजों को समर्पित समय माना जाता है. इसलिए इस दौरान शादी, सगाई, गृह प्रवेश या नया कारोबार शुरू करने जैसे शुभ कामों को टालने की धार्मिक मान्यता है. इसी तरह नई गाड़ी, प्रॉपर्टी या कोई बड़ी खरीदारी करने से भी बचने की सलाह दी जाती है. साथ ही पितृपक्ष में सादगी और मनन-चिंतन का भाव रखने की परंपरा है. इसलिए इस दौरान नए कपड़े खरीदने या पहनने से बचने की सलाह दी जाती है. हालांकि, दान करने के लिए वस्त्र खरीदे जा सकते हैं.
मांस-मदिरा से रखें दूरी
आचार्य के मुताबिक, पितृपक्ष में सात्विक भोजन करने की परंपरा है। इसलिए मांस और मदिरा जैसे तामसिक माने जाने वाले पदार्थों से दूर रहने की सलाह दी जाती है. इन दिनों घर का माहौल शांत रखने पर जोर दिया जाता है. परिवार के सदस्यों को आपसी विवााद, गुस्सा और झगड़े से बचना चाहिए. धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितृपक्ष में सकारात्मक और शांत वातावरण रखनाा शुभ माना जाता है.
असहाय और पशु-पक्षियों को न सताएं
आचार्य मदनमोहन के अनुसार, इस दौरान किसी असहाय व्यक्ति को परेशान नहीं करना चाहिए. पशु-पक्षियों के प्रति भी दया और करुणा का व्यवहार रखने की सलााह दी जाती है. साथ ही पितृपक्ष में श्राद्ध और तर्पण का विशेष महत्व माना गया है. परिवार की परंपरा के अनुसार पूर्वजों का श्राद्ध करनाा इस अवधि का प्रमुख धार्मिक कर्म है.
अपशब्द और झूठ बोलने से बचें
पितृपक्ष में वाणी और व्यवहार को संयमित रखने की सलाह दी जाती है. किसी को अपशब्द कहना, झूठ बोलना या जानबूझकर किसी को दुख पहुंचााना धार्मिक रूप से उचित नहीं मानाा जाता है.


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