अगर किसी ने बैंक से लोन लिया है और किसी वजह से किस्त (EMI) चुकाने में देरी हो गई है, तो अब रिकवरी एजेंट उनसे बदतमीजी नहीं करेंगे. सबके सामने उनकी इज्जत नहीं उछालेंगे. लोन एजेंट को बस आराम से समझाने और टाइम से किस्त भरने की रिक्वेस्ट करने की अनुमति होगी. वे न तो डराएंगे, न धमकाएंगे और न ही धमकी भरे कॉल कर पाएंगे. कॉल करेंगे भी तो ये नहीं कि जब मन किया, घुमा दिया फोन और धमकाने लगे. रिकवरी एजेंट शाम 7 बजे के बाद कॉल नहीं कर सकेंगे. ऐसा इसलिए क्योंकि लोन वसूली के नियमों को 'मानवीय' बनाने के लिए नए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं.
लोन वसूली के लिए अगर बैंक या लोन ऐप वाली कंपनियों के रिकवरी एजेंट आपको धमकाएं, घर पर आकर बेइज्जती करें या हमला करें तो आपके पास पुलिस के पास जाने के अलावा क्या कानूनी अधिकार हैं, जानें लीगल एक्सपर्ट से
नई दिल्ली:
Bank Loan Recovery Rules: देश में निम्न और मध्यम वर्ग की बढ़ती जरूरतों के साथ घर, गाड़ी और फ्रिज-एसी जैसी जरूरतों के लिए लोन लेना आम बात हो गई है. लोग क्रेडिट कार्ड के जरिये भी लाखों की खरीदारी करने लगे हैं, लेकिन कई बार नौकरी जाने या किसी अन्य मुसीबत के कारण कर्जदार लोन की भरपाई करने में नाकाम हो जाता है. लेकिन क्या ऐसी हालत में लाचार ग्राहक को वसूली की धमकी देने, उसके परिवार या रिश्तेदारों को फोन करने या बाउंसरों के जरिये मारपीट का अधिकार बैंक या अन्य वित्तीय कंपनी को मिल जाता है. ऐसी लोन कंपनियां अगर ग्राहक को धमकाएं, घर जाकर बेइज्जत करें तो आम आदमी क्या कर सकता है.आइए जानते हैं कानूनी एक्सपर्ट इस बारे में क्या कहते हैं.
लोन वसूली पर क्या करें (Bank Loan Rules)
दिल्ली हाईकोर्ट के वकील वरुण दीक्षित का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति कर्ज की किस्त या क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान करने में नाकाम है तो बैंक या वित्त कंपनी को धन वसूली का कानूनी अधिकार है, लेकिन केवल कानूनी तरीकों से. वो कर्जदार को धमका नहीं सकते, उस पर हमला नहीं कर सकते. उसे अपमानित नहीं कर सकते या अवैध रूप से परेशान नहीं कर सकते.अदालत और रिजर्व बैंक और कंज्यूमर फोरम ने ऐसे मामलों मेंवसूली प्रक्रियाओं पर सख्त नियम बनाए हैं.
दरअसल, केंद्रीय बैंक RBI ने बैंकों की ओर से लोन वसूली के लिए रिकवरी एजेंट्स की नियुक्ति और व्यवहार संबंधित नियमों को सख्त करने की दिशा में कदम उठाया है. RBI ने कर्जदारों का शोषण, उत्पीड़न रोकने के लिए RBI (Commercial Banks – Responsible Business Conduct) Second Amendment Directions, 2026 शीर्षक से एक ड्राफ्ट जारी किया है.
बैंकों और लोन कंपनियों के क्या अधिकार?
बैंक और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFC) कानूनी तौर पर ये कदम उठा सकती हैं, लेकिन सभी वसूली कानून के दायरे में ही की जानी चाहिए.
क्या कानूनी उपाय संभव
- बकाया राशि की वापसी की मांग करना
- कॉल, ईमेल या नोटिस के माध्यम से रिमाइंडर भेजना
- वसूली एजेंट नियुक्त करना
- दीवानी वसूली कार्यवाही शुरू करना
- सुरक्षित कर्ज के लिए SARFAESI एक्ट जैसे कानूनों के तहत कार्रवाई शुरू करना
- CIBIL जैसे क्रेडिट ब्यूरो को डिफ़ॉल्ट की रिपोर्ट करना
क्या वसूली एजेंट उधारकर्ता के घर जा सकते हैं?
वसूली एजेंट कर्जदार के घर जा सकते हैं, लेकिन सब कुछ कानूनी दायरे में संभव है. बल प्रयोग, मारपीट या आपराधिक धमकी से संबंधित कोई भी वसूली अवैध है. वो कर्जदार को धमका कर या हमलाकर वसूली नहीं कर सकते हैं. ऐसा हो तो पुलिस से संपर्क साधा जा सकता है और एफआईआर कराई जा सकती है.
अब 'वसूली भाई' नहीं, 'सर्टिफाइड' एजेंट आएंगे घर
अब बैंक किसी भी ऐरे-गैरे व्यक्ति को आपके घर वसूली के लिए नहीं भेज पाएंगे. वे प्रॉपर ट्रेंड होंगे. हर रिकवरी एजेंट के पास IIBF (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनेंस) का सर्टिफिकेट होना अनिवार्य होगा.
बैकग्राउंड चेक और पहचान को लेकर भी नियमों का प्रस्ताव है. बैंकों को एजेंट नियुक्त करने से पहले उनका पूरा बैकग्राउंड चेक (Due Diligence) करना होगा. बैंक को अपनी वेबसाइट और ऐप पर अधिकृत एजेंटों की पूरी लिस्ट डालनी होगी. ऐसे में आप तुरंत चेक कर पाएंगे कि आपके दरवाजे पर खड़ा व्यक्ति असली है या फर्जी.
RBI का दिशानिर्देश
- उन्हें सभ्य और पेशेवर तरीके से व्यवहार करना चाहिए.
- वो अपशब्दों का प्रयोग नहीं कर सकते
- वो धमकी या डरा-धमका नहीं सकते.
- वो उधारकर्ता को सरेआम अपमानित नहीं कर सकते
- वो कर्जदार को देर रात या गलत समय पर संपर्क नहीं कर सकते
- परिवार के सदस्यों, पड़ोसियों या सहकर्मियों को परेशान नहीं कर सकते.
- कर्जदार के घर में जबरदस्ती प्रवेश नहीं कर सकते.
- वो कानूनी प्रक्रिया के बिना संपत्ति जब्त नहीं कर सकते.
वसूली एजेंट या बैंक एजेंट पर लगाम
- बिना कानूनी आधार के गिरफ्तारी की धमकी देना
- गुंडों या बाउंसरों का इस्तेमाल करना
- कर्जदार पर शारीरिक हमला करना
- कर्जदार को सार्वजनिक रूप से अपमानित करना
- कर्जदार के फोटो या वीडियो बनाकर वायरल करना
- महिलाओं, बुजुर्गों या बीमार परिजनों को परेशान करना
- बार-बार परेशान करने वाले लहजे में फोन करना
कौन सी चीजें हैं अपराध
- आपराधिक धमकी
- हमला करना
- घर में जबरन घुसना
- जबरन वसूली
- निजता का उल्लंघन
- मानहानि, अपमान करना
पुलिस के अलावा आप कहां से मदद ले सकते हैं?
1. आरबीआई लोकपाल योजना: आप उत्पीड़न या अनुचित वसूली प्रथाओं के लिए बैंकों और गैर सरकारी वित्तीय संस्थानों (एनबीएफसी) के खिलाफ शिकायत दर्ज कर सकते हैं.
2. कंज्यूमर फोरम या कोर्ट: उधारकर्ता को अगर मानसिक उत्पीड़न झेलना पड़े, उसे खराब सामान या सेवा मिलने से दिक्कत हुई है तो कंज्यूमर फोरम या उपभोक्ता न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं. घर, परिवार और रिश्तेदारों को लोन वसूली में परेशान किया जाए तो निजता का उल्लंघन का मामला भी बनता है. अनुचित व्यापार प्रथाओं पर भी मुआवजे की मांग कर सकते हैं.
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3. मानवाधिकार आयोग की शरण: कर्जदार से हिंसा, उसे गैरकानूनी तरीके से बंधन बनाने या सरेआम अपमान करने की घटना हो तो मानवाधिकार आयोग में भी शिकायत कर सकते हैं. लोन वसूली में जबरदस्ती की जाए तो भी ये कदम उठा सकते हैं.
लोन वसूली पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश
ICICI बैंक बनाम प्रकाश कौर (2007) के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट दिशानिर्देश दिए हैं. कोर्ट ने उधारकर्ताओं को डराने-धमकाने वाले वसूली एजेंटों का इस्तेमाल करने वाले बैंकों, NBFC और लोन ऐप की कड़ी आलोचना की है. अदालत ने कहा है कि बैंक गैरकानूनी जबरदस्ती की रणनीति नहीं अपना सकते. अदालत ने कहा कि वसूली केवल कानूनी तरीकों से ही की जानी चाहिए. मैनेजर आईसीआईसीआई ICICI बैंक लिमिटेड बनाम शांति देवी शर्मा (2008) के केस में भी ने वसूली एजेंटों द्वारा उत्पीड़न की निंदा की और जोर दिया कि उधारकर्ताओं की गरिमा और निजता का सम्मान किया जाना चाहिए.
खुशियों में खलल डाला, तो खैर नहीं!
अक्सर देखा जाता था कि रिकवरी एजेंट त्योहारों या शादी-ब्याह के मौके पर पहुंचकर तमाशा करते थे. अब RBI ने इस पर 'लक्ष्मण रेखा' खींच दी है.
- शादी या गम का मौका: शादी, त्यौहार या परिवार में किसी की मृत्यु जैसे संवेदनशील मौकों पर एजेंट आपको परेशान नहीं कर सकेंगे.
- धमकी, गाली-गलौज पर पाबंदी: एजेंट अभद्र भाषा, धमकी या डराने-धमकाने वाले हथकंडे नहीं अपना सकते.
- सोशल मीडिया हैरेसमेंट: सोशल मीडिया पर मैसेज भेजकर या बार-बार कॉल करके परेशान करना अब 'क्रूर व्यवहार' माना जाएगा.
शिकायत पेंडिंग, तो वसूली पर ब्रेक
लोन लेने वालों के लिए ये सबसे बड़ा और राहत देने वाला बदलाव होगा. अगर आपने किसी एजेंट की बदतमीजी के खिलाफ बैंक में शिकायत की है और उसकी जांच चल रही है, तो जब तक शिकायत का निपटारा नहीं हो जाता, बैंक आपसे वसूली की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ा सकता. एजेंट की हर हरकत के लिए बैंक सीधे तौर पर जिम्मेदार होगा. हर नोटिस पर शिकायत अधिकारी का नाम और नंबर देना अनिवार्य होगा.
एजेंट बदलते ही तुरंत मिलेगा SMS
वसूली के खेल में 'सरप्राइज विजिट' को खत्म करने के लिए RBI ने नियम बनाया है कि अगर बैंक आपके केस के लिए एजेंट बदलता है, तो इसकी जानकारी आपको तुरंत SMS या ईमेल के जरिए देनी होगी. बिना सूचना दिए नया एजेंट आपके पास नहीं आ सकता.
अगर कोई एजेंट आपको परेशान करता है, तो आप बैंक के 'ग्रीवेंस रिड्रेसल मैकेनिज्म' (शिकायत निवारण तंत्र) का सहारा लिया जा सकेगा. लोन वसूलना बैंक का अधिकार है, लेकिन कर्जदार की गरिमा (Dignity) को ठेस पहुंचाने की आजादी नहीं रहेगी.

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