गांव में मिला 50 टन किलो सोने का खजाना, 9 हजार करोड़ का गोल्ड करेगा मालामाल, बदलेगी जोन्नागिरी की किस्मत

गांव में मिला 50 टन सोने का खजाना, 9 हजार करोड़ का गोल्ड करेगा मालामाल, बदलेगी जोन्नागिरी की किस्मत

भारत में सोने का विशाल भंडार मिला है. विदेशों से सोने के आयात को लेकर बढ़ती चिंता के बीच आंध्र प्रदेश में सोने का यह खजाना भारत की टेंशन दूर कर सकता है. आइए जानते हैं पूरी कहानी...
गांव में मिला 50 टन किलो सोने का खजाना, 9 हजार करोड़ का गोल्ड करेगा मालामाल, बदलेगी जोन्नागिरी की किस्मत
कुरनूल: Gold News India: भारत में हजारों किलोग्राम सोने का बड़ा खजाना मिला है. आंध्र प्रदेश के रायलसीमा इलाके के कुरनूल जिले के जोंनागिरी, एर्रागुडी और पगड़ीरॉयी गांवों के पास करीब 1500 एकड़ में सोने का यह विशाल भंडार मिला है. सोने के भंडार से इस गांव के साथ पूरे इलाके की तस्वीर बदल सकती है. हर साल विदेशों से भारी मात्रा में सोना खरीदने वाले भारत को भी थोड़ी राहत मिलेगी.  जोंनागिरी के अलावा रामगिरी, जव्वकुला, चिगुरु कुंटा और बिसनाथम में भी सोने के नए ब्लॉकों का पता चला है. यह देश में सोना देने वाली सबसे बड़ी खान होगी.आजादी के बाद यह देश की पहली बड़ी प्राइवेट गोल्ड माइन होगी. जियोमैसूर सर्विसेज और डेक्कन गोल्ड माइंस लिमिटेड यहां सोने की माइनिंग करेंगी. जोंनागिरी गांव का नाम स्वर्णागिरी करने की तैयारी है. भारत में अभी सोने की कीमत 1 लाख 46 हजार रुपये प्रति तोला के आसपास है. जबकि चांदी की कीमत भी 2.5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक गिर गई है.

  • 50 हजार किलोग्राम सोने का भंडार का पता चला
  • 7500 एकड़ इलाके में होगी गोल्ड माइनिंग
  • 9000 करोड़ रुपये कीमत का सोना

सोने का भंडार कितना बड़ा

भू वैज्ञानिक और खनन विभाग के अनुसार, इस पूरी खदान में 50 हजार किलो सोने का भंडार होने का अनुमान है. इसकी बाजार में कीमत लगभग 7500 करोड़ से 9000 करोड़ है. 1500 एकड़ में से अभी केवल 500 एकड़ में सोने की खोज और सर्वे का काम हुआ है. इसमें 13 हजार किलो सोने की मौजूदगी मिली है. बाकी एक हजार एकड़ भूमि पर खनन और खोज का दायरा बढ़ेगा. इससे गोल्ड भंडार 50 टन तक पहुंचने की पूरी संभावना है.यहां आधुनिक मशीनों से पथरीले इलाके में गोल्ड माइनिंग की प्रोसेसिंग की जा रही है. एक टन कच्चे लौह अयस्क वाली धातु को प्रोसेस कर सोना निकाला जा रहा है.

जोंनागिरी में सोने का भंडार

जोंनागिरी एरिया ग्रीनस्टोन बेल्ट का हिस्सा है. यहां कभी बड़े पैमाने पर सोने और तांबे का खनन होता था. खुदाई के दौरान यहां पुराने पत्थरों को कूटने-पीसने के प्राचीन निशान मिले हैं. इससे साबित होता है कि सदियों पहले भी लोग यहां सोना निकालते थे.भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने 1991 से 1994 के बीच यहां डायमंड कोर ड्रिलिंग की थी. GSI ने ही सबसे पहले यहां के डोना ईस्ट और डोना वेस्ट ब्लॉकों में भारी मात्रा में सोने के कणों की मौजूदगी की पुष्टि की थी.

हर साल 800 किलो शुद्ध सोना निकलेगा

कंपनी का लक्ष्य हर साल 400 से 800 किलो शुद्ध सोना निकालने की है. इसे एक हजार से दो हजार किलो सालाना तक बढ़ाया जाएगा. 405 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट से 7 सौ लोगों को सीधा रोजगार मिला है. आंध्र प्रदेश सरकार को 4% की रॉयल्टी भी मिलेगी.सरकार को 400 किलो सोने पर 57 करोड़ और 900 किलो सोना उत्पादन से लगभग 144 करोड़ रुपये मिलेंगे.

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