ED-CBI अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट, 48 लाख की साइबर ठगी का खुलासा, गैंग के 3 लोग गिरफ्तार
फर्जी फर्म और बैंक खातों के जरिए देशभर में साइबर ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह के तीन सदस्य गिरफ्तार, 1.42 करोड़ की ठगी का अनुमान
कानपुर नगर। साइबर अपराध के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत कमिश्नरेट कानपुर नगर की साइबर क्राइम थाना पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने योजनाबद्ध कार्रवाई करते हुए खुद को ईडी एवं सीबीआई का अधिकारी बताकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट करने और भय दिखाकर साइबर ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह के तीन सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है।पुलिस के अनुसार गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान वासु पुत्र स्व. नन्दू प्रसाद, निवासी नवाबगंज कानपुर नगर, आतिश कुमार पुत्र इन्द्र पाल, निवासी रायबरेली तथा कंचन प्रजापति पत्नी रोहित प्रजापति, निवासी कैंट कानपुर नगर के रूप में हुई है। इनके कब्जे से तीन एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। मोबाइल फोन की जांच में आपराधिक कॉल रिकॉर्ड, व्हाट्सऐप चैट तथा साइबर अपराध से संबंधित महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिले हैं।
पूछताछ में पुलिस के मुताबिक अभियुक्तों ने बताया कि गिरोह के सदस्य पहले पीड़ित से ईडी का वरिष्ठ अधिकारी बनकर बातचीत करते थे, जिसके बाद कॉल को अपने सहयोगी के पास ट्रांसफर कर दिया जाता था। सहयोगी स्वयं को सीबीआई का वरिष्ठ अधिकारी बताकर पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग अथवा अन्य आपराधिक मामले में फंसने का डर दिखाता था। इसके बाद पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट कर उससे धनराशि की उगाही की जाती थी।
इसी तरीके से कानपुर नगर के स्वरूप नगर निवासी योगेश चन्द्र मिश्रा को सीबीआई का वरिष्ठ अधिकारी बनकर फोन किया गया और उनसे करीब 48 लाख रुपये की साइबर ठगी किए जाने का मामला सामने आया है।
फर्जी दस्तावेजों से बनाई फर्जी फर्म
जांच में सामने आया कि अभियुक्तों ने अपने आधार कार्ड एवं पैन कार्ड में कूटरचना कर स्वयं को प्रतापगढ़ जनपद का निवासी दर्शाया और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर BAUKOYO CONTRACTORS PRIVATE LIMITED नाम से फर्जी फर्म पंजीकृत कराई। इसके बाद बैंक खाता खुलवाकर उसमें 15 ट्रांजैक्शन के माध्यम से कुल 25,98,200 रुपये जमा कराए गए।
पुलिस के अनुसार इस धनराशि को उसी दिन देश के विभिन्न राज्यों के 611 अलग-अलग बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया। बरामद मोबाइल फोन से फर्जी फर्म और घटना में प्रयुक्त बैंक खातों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी भी प्राप्त हुई है।
चार साइबर अपराध शिकायतों का पता
पुलिस ने बरामद खातों की NCRP पोर्टल पर जांच की तो देश के विभिन्न राज्यों से इनके माध्यम से साइबर अपराध की चार शिकायतें दर्ज मिलीं। पुलिस के अनुसार अब तक इन मामलों में करीब 1,42,68,000 रुपये की अनुमानित साइबर ठगी का पता चला है। विभिन्न राज्यों की साइबर क्राइम विंग से समन्वय कर अन्य मामलों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
मुकुल चौबे वांछित
मामले में गिरफ्तार अभियुक्तों के बयान तथा अब तक एकत्र किए गए साक्ष्यों के आधार पर मुकुल चौबे पुत्र इन्द्र प्रकाश चौबे, निवासी कानपुर नगर को वांछित किया गया है। पुलिस के अनुसार मुकुल चौबे के विरुद्ध पूर्व में भी कूटरचना, धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और आईटी एक्ट से संबंधित मुकदमे दर्ज हैं।
वैज्ञानिक परीक्षण में जुटी साइबर थाना पुलिस
प्रकरण में मु0अ0सं0-59/2026, धारा 338, 318(4), 61(2) बीएनएस एवं 66-D आईटी एक्ट के तहत विधिक कार्रवाई की गई है। बरामद मोबाइल फोन, सिम कार्ड एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का वैज्ञानिक परीक्षण कराया जा रहा है। पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों, बैंक खातों और साइबर ठगी के नेटवर्क की जांच में जुटी है।
इन पुलिसकर्मियों ने किया गिरोह का खुलासा
इस कार्रवाई में प्रभारी निरीक्षक अभय कुमार सिंह, निरीक्षक महेन्द्र सिंह, उपनिरीक्षक सद्दाम खान, उपनिरीक्षक संजीव कुमार, उपनिरीक्षक रवि शंकर, हेड कांस्टेबल शरीफ खान, कांस्टेबल सौरभ पाण्डेय, कांस्टेबल नितिन कुमार एवं महिला कांस्टेबल सोनी यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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